वर्दी, साहस और गंगा की धार: मौत से बेखौफ होकर उफनती नदी में कूदी तारा कुमारी, हर कोई कर रहा सलाम

खाकी का मानवीय चेहरा: पटना के दीघा घाट पर महिला ट्रैफिक कांस्टेबल तारा कुमारी का अदम्य साहस

खाकी का मानवीय चेहरा: पटना के दीघा घाट पर महिला ट्रैफिक कांस्टेबल तारा कुमारी का अदम्य साहस- फोटो : news 4 nation

राजधानी पटना के दीघा घाट पर रविवार को माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक दर्दनाक हादसा हो गया। धार्मिक स्नान के लिए गया जिले से आए दो श्रद्धालु, 50 वर्षीय गार्ड बाबू और 30 वर्षीय धनंजय कुमार, गंगा की लहरों में समा गए। घाट पर मौजूद सैकड़ों लोग इस मंजर को मूकदर्शक बनकर देखते रहे, लेकिन डूबते हुए लोगों को बचाने के लिए कोई भी आगे नहीं आया। लोग मोबाइल से वीडियो बनाते रहे, पर किसी ने भी नदी में उतरने का साहस नहीं दिखाया।

महिला कांस्टेबल तारा कुमारी का अदम्य साहस

जब आम लोग तमाशा देख रहे थे, तभी वहां तैनात महिला ट्रैफिक कांस्टेबल तारा कुमारी को इस घटना की सूचना मिली। बिना एक पल गंवाए और बिना किसी लाइफ जैकेट या सुरक्षा उपकरण के, तारा कुमारी ने अपनी पुलिस वर्दी में ही उफनती गंगा में छलांग लगा दी। उनके इस निस्वार्थ साहस को देखकर वहां मौजूद भीड़ दंग रह गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में तारा कुमारी को वर्दी पहने हुए पानी की गहराइयों में डूबे लोगों की तलाश करते हुए साफ देखा जा सकता है।

खतरनाक लहरें और फर्ज के प्रति समर्पण

गंगा नदी की तेज धार और खतरनाक गहराई के बावजूद तारा कुमारी काफी देर तक दोनों युवकों को बचाने के लिए संघर्ष करती रहीं। उन्होंने उस स्थान के आसपास बार-बार गोता लगाया जहाँ पीड़ितों को आखिरी बार देखा गया था। एक महिला कांस्टेबल का अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की रक्षा के लिए इस तरह कूदना उनके कर्तव्य के प्रति समर्पण को दर्शाता है। हालांकि, कड़े संघर्ष के बाद भी वे दोनों व्यक्तियों को नहीं ढूंढ पाईं, लेकिन उनके इस जज्बे ने खाकी की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया है।

गया से आए थे श्रद्धालु, जज्बे को सलाम

पुलिस जांच के अनुसार, डूबे हुए दोनों व्यक्ति गया जिले के चाकन थाना क्षेत्र के रहने वाले थे और पवित्र स्नान के लिए पटना आए थे। वे नदी की गहराई और लहरों के वेग का अंदाजा नहीं लगा पाए और हादसे का शिकार हो गए। भले ही इस घटना का अंत दुखद रहा, लेकिन तारा कुमारी की बहादुरी ने पूरे पुलिस महकमे और पटनावासियों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। आज हर कोई इस जांबाज महिला सिपाही के साहस और मानवीय संवेदना को सलाम कर रहा है।