खेतों में तबाही, किसानों की आंखों में आंसू!  मोकामा-बड़हिया टाल क्षेत्र में 20 लाख किसानों-मजदूरों पर बड़ा संकट

गभग 1 लाख हेक्टेयर से अधिक में फैले मोकामा-बड़हिया टाल क्षेत्र को अपनी बेमिसाल रबी फसल (विशेषकर दलहन) के लिए बिहार ही नहीं देश का "दाल का कटोरा" कहा जाता है.

Mokama-Barhiya Tal - फोटो : news4nation

Mokama-Barhiya Tal  : बरसात की बूंदें कभी जीवन देती हैं, लेकिन इस बार बारिश ने बिहार के किसानों की मेहनत को बहा दिया है. बेमौसम की बारिश ने बिहार के सबसे बड़े दलहन उत्पादक क्षेत्र मोकामा-बड़हिया टाल के किसानों को बड़े संकट में डाल दिया है. खेतों में लहलहाती फसलें, जिनमें किसानों ने अपनी उम्मीदें बोई थीं, आज पानी में डूबी पड़ी हैं. महीनों की मेहनत और दिन-रात की मेहनत सब कुछ एक ही बारिश ने छीन लिया.


लगभग 1 लाख हेक्टेयर से अधिक में फैले मोकामा-बड़हिया टाल क्षेत्र को अपनी बेमिसाल रबी फसल (विशेषकर दलहन) के लिए बिहार ही नहीं देश का "दाल का कटोरा" कहा जाता है. लेकिन 20 और 21 मार्च को अचानक बदले मौसम ने मसूर, चना, मटर, खेसारी की तैयार फसलों पर हुए बारिश और ओलों के वज्रपात ने किसनों की पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया है. चाहे तिलहन का राई, सरसों या तीसी हो या फिर गेहूं की बालियां हर फसल को शूल की तरह बरसती बूंदों ने बर्बाद कर दिया. 


पटना, नालंदा, लखीसराय में फैला मोकामा-बड़हिया टाल क्षेत्र करीब 20 लाख किसानों और श्रमिकों की पूरे वर्ष की आजीविका का प्रमुख साधन है. एक फसल होने वाली इस भूमि पर मुख्य रूप से दलहन की पैदावार होती है. अक्टूबर-नवम्बर में बुआई और मार्च-अप्रैल में कटाई वाली दलहनी फसलें इस वर्ष भी लहलहाते नजर आ रही थी. लेकिन मौसमी कहर ने न सिर्फ फसलों को नुकसान पहुंचाया है बल्कि लाखों किसानों की मेहनत जमींदोज हो गई है. 


दलहनी फसलों की कटाई के समय हुई इस बारिश से हजारों एकड़ में लगी फसल बर्बाद होने से किसानों की पूरे साल की कमाई चौपट हो गई है.तेज हवाओं और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे क्षेत्र के किसानों में हड़कंप मच गया है. आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने अन्नदाताओं को आफत में डाल दिया है. बारिश के कारण कटी हुई फसलों को सड़ने का खतरा मंडरा रहा है. 


वहीं खेतों में तैयार फसल को काटने वाले मजदूरों को भी बारिश ने आफत ने आफत में डाल दिया है. एक अनुमान के मुताबिक मोकामा-बड़हिया टाल में इन दिनों करीब 50 हजार बाहरी मजदूर आसपास के कई जिलों और झारखंड से फसल कटाई के लिए आए हुए हैं. पिछले कुछ सप्ताह से वे खलिहानों में डेरा बनाकर, मिट्टी का चूल्हा जलाकर खाना बनाते हैं. लेकिन बारिश ने उनके सामने खाने-पीने का संकट खड़ा कर दिया है. चूल्हा बारिश में गीला हो चुका है. आसमान से टपकती बूंदों के कारण अपने झोपड़े से भी मजदूर बाहर नहीं आ सकते. ऐसे में किसानों की फसलों को काटने वाले मजदूर बारिश के काल के कारण भूख के दंश को भी झेलने लगेंगे. 


किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं होता, वह अपने हर खेत में अपने सपनों को उगाता है. जब फसल बर्बाद होती है, तो सिर्फ अनाज नहीं, उसका आत्मविश्वास और भविष्य भी टूट जाता है. मोकामा-बड़हिया टाल क्षेत्र के लाखों किसानों के जीवन पर आया यह संकट ऐसा है जिसमें अगर किसान टूट गया, तो देश की थाली भी सूनी हो जाएगी.
कमलेश की रिपोर्ट