Bihar Politics: जन सुराज का विधानसभा चुनाव में क्यों हुआ सियासी सूपड़ा साफ? पीके की सियासी लैब पर पूर्व सहयोगी का बड़ा हमला, हार के पीछे गिनाए ये 9 कारण
Bihar Politics: पीके की कोर टीम का हिस्सा रहे अफजल आलम ने ऐसा सियासी चार्जशीट पेश किया है, जिसने जन सुराज के संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Bihar Politics: बिहार की सियासत में खुद को बदलाव का पैगंबर बताने वाले प्रशांत कुशोर की जन सुराज पार्टी को 2025 विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त पर अब अंदरखाने से ही सवालों की बरसात शुरू हो गई है। कभी पीके की कोर टीम का हिस्सा रहे अफजल आलम ने ऐसा सियासी चार्जशीट पेश किया है, जिसने जन सुराज के संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अफजल आलम, जो अप्रैल 2024 से लगभग 15 महीने तक जन सुराज की डिजिटल कम्युनिकेशन टीम में काम कर चुके हैं, ने फेसबुक पोस्ट के जरिए दावा किया कि पार्टी की हार किसी बाहरी साजिश का नतीजा नहीं, बल्कि अंदरूनी अव्यवस्था, फेवर्टिजम और जमीनी हकीकत से कटे नेतृत्व का अंजाम थी। उनके मुताबिक पूरी पार्टी “वन मैन शो” बनकर रह गई थी, जहां हर फैसले की डोर सिर्फ पीके के हाथ में थी और युवा कार्यकर्ता सिर्फ आदेश मानने तक सीमित थे।
अफजल ने आरोप लगाया कि पार्टी में टैलेंट से ज्यादा चापलूसी को तरजीह मिली। जो लोग सवाल पूछते थे या नई रणनीति सुझाते थे, उन्हें किनारे लगा दिया जाता था। बिहार की सामाजिक बनावट और स्थानीय समीकरण समझने वाले कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा गया, जिसकी वजह से कई चुनावी मुद्दे सिर्फ हवा-हवाई साबित हुए।
उन्होंने टिकट वितरण पर भी बड़ा हमला बोला। अफजल के अनुसार, नए और साफ-सुथरी छवि वाले चेहरों की बजाय जातीय गणित, पैसे और निजी पसंद को प्राथमिकता दी गई। इससे जमीनी कार्यकर्ताओं का भरोसा टूट गया और जनता के बीच बदलाव की राजनीति का संदेश कमजोर पड़ गया।
पूर्व कर्मचारी ने यह भी दावा किया कि टीम पर जरूरत से ज्यादा काम का दबाव डाला गया। दिनभर फील्ड में खटने के बाद देर रात तक मीटिंग और डेटा वर्क कराया जाता था, जिससे कार्यकर्ताओं में मानसिक थकान और मायूसी बढ़ती गई।
अफजल के मुताबिक एचआर और टीम मैनेजमेंट भी पूरी तरह नाकाम रहा। एक ही काम कई टीमों से करवाया गया, संसाधनों की बर्बादी हुई और अभियान में तालमेल खत्म हो गया। नतीजा यह हुआ कि जिस जन सुराज को बिहार की राजनीति का नया तूफान बताया जा रहा था, वह चुनावी मैदान में एक भी सीट जीतने में नाकाम रहा।
ब्यूरो रिपोर्ट