Bihar News: आवास योजना की सूची से नाम गायब होने पर भड़के ग्रामीण, आवास सहायक पर 3 हजार रुपये मांगने का आरोप

Bihar News: ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे के दौरान सूची में नाम शामिल करने के बदले 3 हजार रुपये की मांग की गई। रुपये नहीं देने पर उनका नाम सूची से हटा दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

आवास योजना की सूची से नाम गायब होने पर भड़के ग्रामीण- फोटो : reporter

Bihar News: बिहार के सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड अंतर्गत हाटी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। जरूरतमंद परिवारों ने आवास योजना की सूची से नाम गायब होने पर आवास सहायक और कथित बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे के दौरान सूची में नाम शामिल करने के बदले 3 हजार रुपये की मांग की गई। रुपये नहीं देने पर उनका नाम सूची से हटा दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

3 हजार रुपये मांगने का आरोप, पैसे नहीं देने पर सूची से नाम गायब

ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने की उम्मीद में उन्होंने सर्वे के दौरान अपनी जानकारी उपलब्ध कराई थी। आरोप है कि नाम जोड़ने के लिए उनसे 3 हजार रुपये मांगे गए। आर्थिक तंगी के कारण रुपये नहीं दे पाने वाले जरूरतमंद परिवारों का नाम सूची में शामिल नहीं किया गया।

ग्रामीणों के मुताबिक, पंचायत में ऐसे कई परिवार हैं, जो लंबे समय से जर्जर और खोपड़ीनुमा घरों में रहने को मजबूर हैं। कुछ लोगों का दावा है कि वे पिछले 15 वर्षों से बेहद खराब आवासीय परिस्थितियों में गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।

फोन करने पर नंबर ब्लॉक करने का भी आरोप

ग्रामीणों ने आवास सहायक के कामकाज पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्या बताने के लिए फोन करते हैं, तो उनके मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिए जाते हैं। उनका यह भी दावा है कि आवास सहायक सीधे बातचीत करने के बजाय कथित बिचौलियों के माध्यम से संपर्क करवाते हैं।इन आरोपों के सामने आने के बाद पंचायत में आवास योजना के लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को मिलना चाहिए, न कि कथित तौर पर पैसे देने वालों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पात्र परिवारों के नाम आवास सूची में शामिल करने और यदि रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।अब सवाल यह है कि सूची से नाम गायब होने के मामले की जांच कब होगी और वर्षों से कच्चे मकानों में रह रहे जरूरतमंद परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ कब तक मिल पाएगा। फिलहाल, आवास सहायक का पक्ष और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्टर- छोटू सरकार