डालमियानगर के अच्छे दिन - रेल वैगन मरम्मत कारखाना शुरू करने का रास्ता साफ, केंद्र ने दी इतने सौ करोड़ की मंजूरी, जल्द शुरू होगा काम
डालमियानगर रेल वैगन मरम्मत कारखाने के लिए 403.20 करोड़ का बजट मंजूर। उपेंद्र कुशवाहा ने पीएम मोदी और अश्विनी वैष्णव को दिया धन्यवाद। जानें कब शुरू होगा काम।
Dehri - : बिहार के औद्योगिक गौरव डालमियानगर को फिर से जीवित करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। राज्यसभा सांसद और रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने डालमियानगर में रेल वैगन मरम्मत कारखाना के लिए केंद्र सरकार द्वारा 403.20 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को बधाई दी है। उन्होंने इसे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक मील का पत्थर बताया है।
2014 से जारी संघर्ष को मिली मंजिल
उपेंद्र कुशवाहा ने भावुक होते हुए कहा कि डालमियानगर में रेल कारखाने का सपना उन्होंने 2014 में काराकाट से सांसद चुने जाने के साथ ही देखा था। जून 2017 में रेल मंत्री के साथ हुई अहम बैठक में इस पर मुहर लगी थी, लेकिन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFCC) के कारण तकनीकी बाधाएं आ रही थीं। कुशवाहा ने स्वयं पहलेजा से फ्लाईओवर बनाकर रेल कारखाना स्थल तक ट्रैक ले जाने का तकनीकी सुझाव दिया, जिससे वर्षों से फंसी बाधा दूर हुई और अब निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
'राइट्स' (RITES) संभालेगा कमान, जल्द शुरू होगा काम
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी रेल मंत्रालय की एजेंसी 'राइट्स' को दी गई है। बजट आवंटन के बाद अब धरातल पर काम शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। कुशवाहा ने बताया कि इस कारखाने के शुरू होने से न केवल रेलवे की बुनियादी संरचना मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जिससे रोहतास जिले की तस्वीर बदल जाएगी।
उद्योग मंत्री और बिहार सरकार का मिला साथ
उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार के उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल का भी विशेष आभार प्रकट किया। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली में आयोजित औद्योगिक विकास की बैठक में डालमियानगर के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी 'विकसित बिहार, समृद्ध बिहार' की परिकल्पना को साकार करने में जुटी है।
अगले 5 साल: बिहार में औद्योगिक क्रांति का आगाज
सांसद ने विश्वास जताया कि आने वाले पांच वर्षों में बिहार में तेजी से औद्योगिक विकास होगा। डालमियानगर का यह रेल कारखाना केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि बिहार के औद्योगिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनेगा। स्थानीय लोगों में इस खबर के बाद खुशी की लहर है, क्योंकि बंद पड़े डालमियानगर के परिसरों में एक बार फिर मशीनों की गूँज सुनाई देगी।