Bihar Mineral Resources: बिहार की जमीन के नीचे छिपा खजाना होगा बेनकाब, GSI की मदद से खनिजों की खोज तेज, ब्लॉकों की होगी ई-नीलामी

Bihar Mineral Resources: बिहार सरकार ने खनिज संपदा की संभावनाओं का पता लगाने और उसके व्यवस्थित दोहन की कवायद शुरू कर दी है।...

जमीन के नीचे छिपा खजाना होगा बेनकाब- फोटो : reporter

Bihar Mineral Resources: बिहार की जमीन के नीचे छिपे खनिज संसाधनों की तलाश अब आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सर्वे के जरिए तेज की जाएगी। राज्य सरकार ने खनिज संपदा की संभावनाओं का पता लगाने और उसके व्यवस्थित दोहन की कवायद शुरू कर दी है। खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी GSI के सहयोग से राज्य के नए इलाकों में खनिज अन्वेषण कराया जाएगा। इसका मकसद ऐसे क्षेत्रों की तलाश करना है, जहां जमीन के भीतर बहुमूल्य खनिज भंडार मौजूद होने की संभावना है, लेकिन अभी तक वहां पर्याप्त सर्वेक्षण और अन्वेषण नहीं हो सका है।

सरकार की इस पहल के तहत वैज्ञानिक तरीके से यह पता लगाया जाएगा कि किस इलाके में कौन-सा खनिज मौजूद है, उसकी गुणवत्ता कैसी है और उसका संभावित भंडार कितना हो सकता है। इससे बिहार की खनिज संपदा का एक अधिक सटीक खाका तैयार करने में मदद मिलेगी।

GSI बताएगा, कहां छिपा है खनिज का भंडार

सचिव अवनीश कुमार सिंह के मुताबिक खनिज अन्वेषण को रफ्तार देने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अधिकारियों के बीच विशेष बैठक की तैयारी है। बैठक में बिहार के अलग-अलग हिस्सों में खनिज मिलने की संभावनाओं, वैज्ञानिक सर्वे और आगे की कार्ययोजना पर मंथन होगा।

अन्वेषण के दौरान चिह्नित संभावित इलाकों से खनिज की उपलब्धता और भंडार से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आगे संभावित क्षेत्रों को खनिज ब्लॉक के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके बाद नियमों के मुताबिक इन ब्लॉकों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू होगी।सरकार का मकसद सिर्फ जमीन के नीचे छिपे खनिजों का पता लगाना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना भी है। नए खनिज ब्लॉकों के विकास से राज्य में खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ने, रोजगार के अवसर पैदा होने और सरकारी राजस्व में इजाफे की उम्मीद है।

ई-नीलामी में पारदर्शिता पर जोर

बिहार सरकार बड़े खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी को ज्यादा पारदर्शी, तकनीक आधारित और प्रतिस्पर्धी बनाने की तैयारी में भी जुटी है। इसके लिए यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है। तकनीक के जरिए नीलामी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने से गड़बड़ी की गुंजाइश कम करने और इच्छुक कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

रिपोर्ट-मनोज कुमार सिंह