सरकारी राशि की बंदरबांट पर डीएम की बड़ी कार्रवाई : पंचायत सचिव सस्पेंड, मुखिया को हटाने की प्रक्रिया शुरू
Bihar News : सीतामढ़ी जिले में सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित राशि का उपयोग धरातल पर कार्य करने के बजाय आपसी मिलीभगत से बंदरबांट मामले में डीएम ने बड़ी कार्रवाई की है। पंचायत सचिव को सस्पेंड कर दिया गया है। मुखिया को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया शुरु
Desk : बिहार के सीतामढ़ी जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। जिले के बोखड़ा प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चकौती में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के विरुद्ध जिला प्रशासन ने अबतक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सरकारी राशि की बंदरबांट के गंभीर आरोपों को देखते हुए जिलाधिकारी रिची पांडेय ने कड़ा रुख अपनाया है। डीएम के निर्देश के बाद अब चकौती पंचायत के मुखिया अशोक कुमार को उनके पद से हटाने की वैधानिक प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी गई है, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिलाधिकारी ने न केवल मुखिया पर कार्रवाई की, बल्कि इस वित्तीय घोटाले में शामिल पंचायत सचिव पर भी तत्काल गाज गिराई है। संबंधित पंचायत सचिव को अनुशासनहीनता और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही, डीएम ने पंचायत सचिव के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का स्पष्ट आदेश जारी किया है, ताकि कानूनी शिकंजा कसा जा सके।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, चकौती पंचायत में विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जांच के दौरान यह पाया गया कि सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित राशि का उपयोग धरातल पर कार्य करने के बजाय आपसी मिलीभगत से बंदरबांट कर लिया गया। वित्तीय नियमों की अनदेखी और रिकॉर्ड्स में हेराफेरी के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद जिलाधिकारी ने इस भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंश की नीति अपनाते हुए यह दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की है।
जिलाधिकारी रिची पांडेय ने इस कार्रवाई के माध्यम से जिले के अन्य जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों को भी सख्त संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकारी खजाने की एक-एक पाई जनता के विकास के लिए है और इसमें किसी भी प्रकार की सेंधमारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुखिया के विरुद्ध पद से हटाने की कार्यवाही पंचायती राज अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत की जा रही है, जिसके लिए आवश्यक रिपोर्ट विभाग को भेजी जा रही है।
फिलहाल, इस बड़ी कार्रवाई के बाद बोखड़ा प्रखंड में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का मानना है कि पंचायत सचिव पर एफआईआर दर्ज होने के बाद इस घोटाले की परतें और खुल सकती हैं, जिसमें कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आने की संभावना है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।