सुपौल में जागरूकता कार्यशाला: स्थायी लोक अदालत से जनोपयोगी सेवाओं के विवादों का होगा त्वरित समाधान
Supaul : जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए स्थायी लोक अदालत एक बेहद प्रभावी मंच साबित हो रहा है। आम लोगों को इसके अधिकार क्षेत्र, कार्यप्रणाली और फायदों से रूबरू कराने के उद्देश्य से स्थानीय मीडिएशन सेंटर में एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष सह पूर्व अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार झा ने की, जबकि पूरे कार्यक्रम का सफल संयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव मो. अफजल आलम द्वारा किया गया।
न्यायालय जाने से पहले आपसी सुलह से विवादों का अंत: डॉ. अरबिन्द कुमार झा
कार्यशाला को संबोधित करते हुए स्थायी लोक अदालत के सदस्य डॉ. अरबिन्द कुमार झा ने कहा कि यह मंच जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित मामलों के निपटारे का एक अनूठा माध्यम है। यहां पारंपरिक अदालतों की तरह लंबी और पेचीदा न्यायिक प्रक्रिया से बचते हुए, वाद दायर होने से पहले ही आपसी बातचीत और समझौते के आधार पर मामलों को सुलझा लिया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि आम लोगों को बिजली, पानी, परिवहन, बैंकिंग या बीमा जैसी बुनियादी सेवाओं से जुड़ी कोई शिकायत है, तो वे यहां आवेदन देकर बिना किसी मानसिक और आर्थिक तनाव के शीघ्र न्याय पा सकते हैं।
परिवहन, बैंकिंग और बिजली समेत इन प्रमुख सेवाओं पर मिलेगा सीधा न्याय
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव मो. अफजल आलम ने कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को स्थायी लोक अदालत के क्षेत्राधिकार के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इसके दायरे में डाक सेवा, दूरसंचार, विद्युत व जलापूर्ति, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, अस्पताल, बैंकिंग और बीमा जैसी आवश्यक जनोपयोगी सेवाएं शामिल हैं। अक्सर लोग छोटी समस्याओं के लिए मुख्य अदालतों के चक्कर लगाने से कतराते हैं, लेकिन स्थायी लोक अदालत के माध्यम से ऐसे रोजमर्रा के कानूनी विवादों का निपटारा बेहद सुलभ और कम खर्चीला हो जाता है।
लोक अदालत का फैसला अंतिम और बाध्यकारी, अपील का प्रावधान नहीं
अध्यक्षीय संबोधन में संजय कुमार झा ने इसकी कानूनी शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आवेदन प्राप्त होने पर सबसे पहले दोनों पक्षों में मध्यस्थता का प्रयास किया जाता है। यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति पर पहुंच जाते हैं, तो लोक अदालत द्वारा पारित 'अवार्ड' दोनों पक्षों के लिए कानूनी रूप से पूरी तरह बाध्यकारी होता है। यदि किन्हीं कारणों से समझौता नहीं हो पाता, तो अदालत मामले के तथ्यों और गुण-दोष के आधार पर अपना अंतिम निर्णय सुनाती है। इस निर्णय के विरुद्ध सामान्य रूप से आगे अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे विवाद का हमेशा के लिए अंत हो जाता है।
गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे पारा विधिक स्वयंसेवक
अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम करने और जमीनी स्तर पर न्याय पहुंचाने के लिए अध्यक्ष ने पारा विधिक स्वयंसेवकों (PLVs) को विशेष जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने स्वयंसेवकों से गांव-गांव जाकर लोगों को इस व्यवस्था के प्रति जागरूक करने की अपील की। इस कार्यशाला में स्थायी लोक अदालत के सदस्य लक्ष्मण कुमार के अलावा मेदनी कांत झा, लाल मोहन मुखिया, मणि कांत चौधरी, सीमा कुमारी, पूजा कुमारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय विधिक स्वयंसेवक और प्रतिभागी उपस्थित थे, जिन्होंने इस मंच को समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए एक मजबूत और निष्पक्ष विकल्प बताया।
विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट