बाढ़ और सिंचाई संकट सुलझाने काठमांडू पहुंचे बिहार के अधिकारी: भारत-नेपाल संयुक्त समिति की 11वीं बैठक आज से

नेपाल पहुंचे बिहार के अधिकारी- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : भारत और नेपाल के बीच कोसी एवं गंडक परियोजनाओं से जुड़ी जटिल समस्याओं के समाधान के लिए आज, 30 अप्रैल से काठमांडू में दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक शुरू हो रही है। संयुक्त समिति की यह 11वीं बैठक 1 मई तक चलेगी, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि द्विपक्षीय मुद्दों, बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था में सुधार पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इसके तुरंत बाद 2 मई को नदियों पर बाढ़ पूर्वानुमान गतिविधियों को लेकर एक विशेष संयुक्त बैठक भी प्रस्तावित है, जो मानसून से पहले बिहार की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


कोसी परियोजना: सुरक्षा और अतिक्रमण पर रहेगा जोर 

बैठक के दौरान कोसी परियोजना से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसमें कोसी बराज के आसपास की सुरक्षा, तटबंधों का कटाव और नेपाल क्षेत्र में सेवा पथों के रख-रखाव जैसे तकनीकी विषय शामिल हैं। इसके अलावा, निर्माण सामग्री पर स्थानीय कर, कोशी टप्पू वन्यजीव क्षेत्र से जुड़ी जटिलताएं और परियोजना कर्मियों की सुरक्षा जैसे प्रशासनिक मुद्दों पर भी सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि मानसून के दौरान कार्य निर्बाध रूप से चल सके।


गंडक परियोजना: अवैध कब्जे और जलजमाव से मुक्ति की तैयारी 

गंडक परियोजना के अंतर्गत बिहार को होने वाली कठिनाइयों, जैसे अधिग्रहित भूमि पर अवैध कब्जा और नहरों में सिल्टयुक्त जल प्रवाह के कारण होने वाले जलजमाव पर भी गंभीर मंथन होगा। भारतीय पक्ष की ओर से नहरों में निर्धारित जलस्तर बनाए रखने और कटाव निरोधक कार्यों को गति देने की मांग रखी जाएगी। इन समस्याओं के समाधान से उत्तर बिहार की कृषि भूमि को जलजमाव से राहत मिलने और सिंचाई क्षमता में विस्तार होने की उम्मीद है।


बाढ़ पूर्वानुमान के लिए डेटा साझा करेगा नेपाल 

आगामी मानसून के मद्देनजर बिहार के 'फ्लड फोरकास्टिंग मॉडल' को और अधिक सटीक बनाने पर चर्चा होगी। बैठक में बिहार सरकार नेपाल क्षेत्र से वर्षा और जलस्तर के वास्तविक समय (Real-time) के आंकड़ों को API के माध्यम से साझा करने का प्रस्ताव रखेगी। यदि इस पर सहमति बनती है, तो सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ की पूर्व सूचना समय रहते मिल सकेगी, जिससे जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने में बड़ी मदद मिलेगी।


बिहार और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का जत्था शामिल 

इस रणनीतिक बैठक में बिहार सरकार की ओर से जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, अभियंता प्रमुख वरुण कुमार, ब्रजेश मोहन और सुपौल के जिलाधिकारी सावन कुमार सहित कई मुख्य अभियंता शामिल हो रहे हैं। इसके साथ ही भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी चर्चा का हिस्सा बनेंगे। बिहार सरकार ने सीमावर्ती नदियों के बेहतर प्रबंधन और भारत-नेपाल समन्वय को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट