सुपौल में डीएम का कड़ा एक्शन: बाढ़ से पहले तटबंधों को मजबूत करने का अल्टीमेटम, जर्जर सड़कों की तुरंत होगी मरम्मत
Supaul : जिला समाहरणालय स्थित लहटन चौधरी सभागार में शुक्रवार को जिलाधिकारी (डीएम) सावन कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय तकनीकी पदाधिकारियों की एक मैराथन समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में जिले के भीतर संचालित विभिन्न विभागों की विकास व आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) योजनाओं की बिंदुवार प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए सभी संबंधित कार्यपालक अभियंताओं और तकनीकी अधिकारियों को दोटूक निर्देश दिया कि जनहित से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को तय समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। विकास योजनाओं में किसी भी स्तर पर सुस्ती या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अफसरों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
डीएम बोले— बाढ़ पूर्व तैयारियों में कोताही बर्दाश्त नहीं
कोसी और उसकी सहायक नदियों की विभीषिका झेलने वाले सुपौल जिले के लिए संभावित बाढ़ को देखते हुए बैठक में बेहद गंभीर चर्चा की गई। जिलाधिकारी सावन कुमार ने पूर्वी एवं पश्चिमी तटबंध प्रमंडल के कार्यपालक अभियंताओं को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि बरसात का मौसम दस्तक देने वाला है, लिहाजा संभावित बाढ़ से पहले सभी तटबंधों की मजबूती (फ्लड फाइटिंग वर्क्स) हर हाल में सुनिश्चित कर ली जाए। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि कोसी नदी के संवेदनशील, अति-संवेदनशील और कमजोर स्थलों की तुरंत पहचान कर वहां कटाव निरोधक व सुरक्षात्मक कार्य युद्धस्तर पर पूरे किए जाएं। डीएम ने कहा कि तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी रखी जाए और आपात स्थिति से निपटने के लिए बाढ़ पूर्व आवश्यक लॉजिस्टिक्स और संसाधनों की उपलब्धता अभी से सुनिश्चित कर ली जाए।
बरसात से पहले गडढा मुक्त होंगी जिले की सड़कें, पीडब्ल्यूडी और ग्रामीण कार्य विभाग को मिला टास्क
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जिले की बदहाल परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिए मुख्य रूप से सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़े कार्यों पर सबसे अधिक जोर दिया। उन्होंने पथ निर्माण विभाग (RWD), राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल (NH) और ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंताओं को जिले की सभी क्षतिग्रस्त और जर्जर सड़कों की शीघ्र विशेष मरम्मत (पैच वर्क) कराने का निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि बरसात शुरू होने के बाद जर्जर सड़कों पर जलजमाव होने से स्थिति और भयावह हो जाती है जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए, जिन मुख्य और ग्रामीण रास्तों की स्थिति दयनीय है, वहां तत्काल कार्य शुरू कर आवागमन को सुचारू और सुरक्षित बनाया जाए तथा इन कार्यों की नियमित फील्ड मॉनिटरिंग की जाए।
बुडको, भवन निर्माण और लघु जल संसाधन विभाग की भी क्लास
सड़क और बाढ़ नियंत्रण के अलावा, भवन निर्माण विभाग और बुडको (BUIDCO) द्वारा संचालित विभिन्न बहुउद्देशीय परियोजनाओं और शहरी ड्रेनेज सिस्टम की भी गहन समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने अनावश्यक रूप से लटके और अधूरे पड़े सरकारी भवनों तथा कार्यालय परिसरों के निर्माण को अविलंब पूरा करने का निर्देश दिया ताकि सरकारी संसाधनों की बर्बादी को रोका जा सके। वहीं, कृषि प्रधान जिला होने के कारण लघु जल संसाधन विभाग और शीर्ष कार्य प्रमंडल को जिले के भीतर स्थापित सभी राजकीय नलकूपों और नहर प्रणालियों का रखरखाव समय पर पूरा करने का निर्देश दिया गया ताकि खरीफ सीजन की खेती के लिए स्थानीय किसानों को खेतों तक ससमय पर्याप्त सिंचाई का पानी मिल सके।
डीएम ने दी चेतावनी: योजनाओं में अनावश्यक देरी होने पर तय होगी संबंधित इंजीनियरों की जवाबदेही
गर्मी और आगामी आंधी-पानी के मौसम में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विद्युत आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को भी विशेष टास्क सौंपा गया। जिलाधिकारी ने कहा कि इस मौसम में ट्रांसफार्मर जलने और जर्जर तारों के टूटने से बिजली गुल होने की शिकायतें बढ़ जाती हैं, इसलिए तकनीकी विंग समय रहते मेंटेनेंस का काम पूरा कर ले। बैठक के अंत में डीएम सावन कुमार ने सभी तकनीकी पदाधिकारियों को नसीहत दी कि वे अलग-अलग काम करने के बजाय 'टीम भावना' और आपसी विभागीय समन्वय (इंटर-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन) के साथ काम करें ताकि जिले की विकास योजनाओं को वास्तविक गति मिल सके। बैठक में उपस्थित सभी कार्यपालक अभियंताओं ने जिलाधिकारी को आश्वस्त किया कि सभी परियोजनाओं को पूरी पारदर्शिता और तय मानक के अनुरूप समय पर पूरा कर लिया जाएगा।
विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट