सुपौल में आरएसएस की प्रबुद्ध जन संगोष्ठी : मुख्य वक्ता धर्मेंद्र जी बोले— 'सांस्कृतिक उत्थान से फिर विश्व गुरु बनने की राह पर भारत'

Bihar News : आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सुपौल में प्रबुद्ध जन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य वक्ता धर्मेंद्र जी ने कहा किपिछले 1000 वर्षों में दुनिया में सर्वाधिक हमले और प्रताड़ना झेलने वाला कोई समाज है तो वह हिंदू समाज है...

सुपौल में आरएसएस की प्रबुद्ध जन संगोष्ठी का आयोजन- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के गौरवमयी अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित एक होटल के सभागार में भव्य 'प्रबुद्ध जन संगोष्ठी' का आयोजन किया गया। इस गौरवशाली कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य वक्ता धर्मेंद्र जी (सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख, उत्तर बिहार प्रांत), कार्यक्रम के अध्यक्ष मेजर डॉ. एस. बी. प्रसाद, जिला कार्यवाह लालू प्रसाद लाल, स्वयंसेवक नागेन्द्र नारायण ठाकुर और शालीग्राम पाण्डेय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। संगोष्ठी में जिले भर से लगभग 150 की संख्या में डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित हुए।


सर्वाधिक हमले झेलने के बाद भी अडिग है हिंदू समाज

कार्यक्रम का कुशल संचालन सह जिला कार्यवाह रंजन कुमार ने किया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता धर्मेंद्र जी ने करीब डेढ़ घंटे के अपने ओजस्वी व्याख्यान में कई ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि यदि हम इतिहास के पन्ने पलटकर देखें, तो पाते हैं कि पिछले 1000 वर्षों में दुनिया में सर्वाधिक हमले और प्रताड़ना झेलने वाला कोई समाज है, तो वह हिंदू समाज है। राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्तर पर हुए इन चौतरफा आक्रमणों के बावजूद यह समाज आज भी पूरी जीवंतता के साथ अडिग खड़ा है।


'धर्मही है भारतीय संस्कृति का मुख्य आधार

मुख्य वक्ता ने विभिन्न प्रकार के वैश्विक और आंतरिक खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदू समाज पर कभी क्षेत्रवाद, कभी भाषावाद, कभी जिहाद, कभी आतंकवाद तो कभी साम्यवाद के रूप में प्रहार किए गए। इसके बावजूद, आज यह समाज पूरी दुनिया को शांति का संदेश देने के लिए हिंदुत्व और सनातन के प्रकाश के साथ पूरी ऊर्जा से सक्षम हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अटूट जीवंतता के पीछे का एकमात्र कारण यह है कि भारतीय समाज का केंद्र और उसका मुख्य आधार 'धर्म' है, जो इसे बिखरने नहीं देता।


देश के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की साजिश

धर्मेंद्र जी ने समसामयिक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए सचेत किया कि वर्तमान में देश के भीतर और बाहर से कई षड्यंत्रकारी शक्तियां सक्रिय हैं। ये ताकतें सामाजिक ताने-बाने में जहर घोलकर, विभिन्न प्रकार के मत्तांतरण और धर्मांतरण के जरिए भारतीय एकता व एकात्मता को नष्ट-भ्रष्ट करने के कुत्सित प्रयास में लगी हुई हैं। इन गंभीर चुनौतियों के स्थाई समाधान के लिए संघ 'व्यक्ति निर्माण' की पद्धति पर काम कर रहा है, ताकि राष्ट्र की सज्जन शक्ति को संगठित कर समाज को समरस बनाया जा सके और नागरिकों में राष्ट्र प्रथम का भाव जगाया जा सके।


'पंच परिवर्तनऔर नागरिक कर्तव्यों से सज रहा वातावरण

संगोष्ठी के अध्यक्ष व सेवानिवृत्त गैर संचारी मेडिकल ऑफिसर मेजर डॉ. एस. बी. प्रसाद ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में 'पंच परिवर्तन' विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों में समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब-प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य जैसे 'पंच प्राण' विषयों को लेकर संकल्प भाव जागृत किया जा रहा है। इसी जागृति का परिणाम है कि आज पूरा विश्व भारत की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहा है। देश का सांस्कृतिक उत्थान हो रहा है और भारत माता को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने तथा 'वंदे मातरम' को वैश्विक स्तर पर गुंजायमान करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो रहा है।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट