सुपौल में विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान का औचक निरीक्षण: डीएलएसए सचिव ने बच्चों का जाना हाल
Supaul : जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) सुपौल के सचिव अफजल आलम ने स्थानीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में रह रहे बच्चों से सीधे मुलाकात कर उनके खान-पान, रहन-सहन और स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानी। इसके साथ ही उन्होंने संस्थान द्वारा संचालित की जा रही दत्तक ग्रहण (अडॉप्शन) प्रक्रिया और उससे जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेखों (Records) का भी गहन अवलोकन किया।
सुविधाओं की समीक्षा और बेहतर माहौल देने की वकालत
निरीक्षण के दौरान डीएलएसए सचिव ने संस्थान के पदाधिकारियों और कर्मियों से बच्चों को मिलने वाली रोजमर्रा की सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बच्चों की शिक्षा, नियमित स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की समीक्षा करते हुए कहा कि इन बेसहारा बच्चों को एक बेहतर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि इनका भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल हो सके।
दत्तक ग्रहण के बाद भी बच्चों की नियमित निगरानी के निर्देश
सचिव अफजल आलम ने संस्थान में चल रही अडॉप्शन प्रक्रिया की अद्यतन सूची का मुआयना किया और अब तक गोद लिए गए बच्चों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित कर्मियों को कड़े निर्देश दिए कि बच्चों को गोद दिए जाने के बाद भी उनकी नियमित निगरानी और फॉलोअप (Follow-up) किया जाए। यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि बच्चे नए परिवार में पूरी तरह सुरक्षित और एक अच्छे माहौल में रह रहे हैं।
कानूनी प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने की हिदायत
डीएलएसए सचिव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि दत्तक ग्रहण एक बेहद संवेदनशील और कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें बच्चों का सर्वोत्तम हित ही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने संस्थान के कर्मियों को निर्देशित किया कि सभी निर्धारित कानूनी नियमों का अक्षरशः पालन करते हुए ही जरूरतमंद बच्चों को उचित और योग्य परिवार का संरक्षण दिलाने की दिशा में संजीदगी से कार्य करें।
अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर
बच्चों के साथ समय बिताने और उनकी समस्याओं को समझने के बाद अफजल आलम ने कहा कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को परिवार जैसा माहौल मिलना चाहिए ताकि उनमें आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच पैदा हो। उन्होंने संस्थान की मौजूदा व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि विधिक सेवा प्राधिकार बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बाल संरक्षण के मामलों में सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की बात कही।
विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट