Bihar News: कोसी नदी बनी काल का गढ़, नहाने गई 4 मासूम बच्चियां गहरे पानी में समाईं,3 की दर्दनाक मौत, 1 अब भी लापता, गांव में मातमी सन्नाटा

Bihar News: चार बच्चियां गर्मी से राहत पाने के लिए कोसी नदी में नहाने गई थीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह मस्ती का पानी कुछ ही पलों में मौत की धारा बन जाएगा।...

तीन मासूमों की मौत से मचा कोहराम- फोटो : reporter

Bihar News:सुपौल जिले के सदर थाना क्षेत्र से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां कोसी नदी ने एक बार फिर अपनी रौद्र और जानलेवा छवि दिखा दी। गोपालपुर सिरे पंचायत के वार्ड संख्या-2 में रविवार का दिन उस वक्त चीख-पुकार और मातम में बदल गया, जब नहाने गई चार मासूम बच्चियां नदी की तेज धारा में समा गईं।

बताया जा रहा है कि चारों बच्चियां गर्मी से राहत पाने के लिए कोसी नदी में नहाने गई थीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह मस्ती का पानी कुछ ही पलों में मौत की धारा बन जाएगा। नदी के तेज बहाव और गहराई का अंदाजा न लग पाने के कारण चारों बच्चियां अचानक बहाव में फंस गईं और देखते ही देखते लापता हो गईं।

घटना की सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग तुरंत नदी किनारे पहुंचे और खोजबीन शुरू की। काफी मशक्कत के बाद तीन बच्चियों के शव बरामद किए गए, जबकि एक बच्ची अब भी लापता है। उसकी तलाश के लिए स्थानीय गोताखोरों की टीम लगातार नदी में उतरकर सर्च ऑपरेशन चला रही है।

इस दर्दनाक हादसे में जिन बच्चियों की पहचान हुई है, उनमें पप्पू राम की 12 वर्षीय पुत्री प्रियांशु कुमारी, प्रमोद सादा की 12 वर्षीय पुत्री सुनीता कुमारी और ललित सादा की 10 वर्षीय पुत्री नंदनी कुमारी शामिल हैं। वहीं लापता बच्ची राधिका कुमारी, लाल सादा की 10 वर्षीय पुत्री बताई जा रही है। जैसे ही तीन शव गांव पहुंचे, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। परिजनों की चीख-पुकार और रोने-बिलखने की आवाजों ने माहौल को और भी गमगीन कर दिया। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है, हर आंख नम है और हर चेहरा सदमे में डूबा हुआ है।

मौके पर पहुंची सदर थाना पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सदर थानाध्यक्ष रामसेवक रावत ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है और लापता बच्ची की तलाश लगातार जारी है। कोसी नदी का यह हादसा एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया है कि आखिर कब तक यह जानलेवा धारा मासूम जिंदगियों को निगलती रहेगी और कब तक लापरवाही का खामियाजा गांव अपने बच्चों की लाशों के रूप में भुगतता रहेगा।

रिपोर्ट - विनय कुमार मिश्र