Sharad Navratri 2026: आमी के सिद्धपीठ में माँ अंबिका भवानी के दरबार में उमड़ा जनसैलाब, अलौकिक शृंगार , गगनभेदी जयकारों से गूंजा चराचर जगत

Sharad Navratri 2026: प्रतिष्ठित सिद्धपीठ माँ अंबिका भवानी का पवित्र प्रांगण शरदीय नवरात्र के इस पावन वेला में अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन चुका है।

माँ अंबिका भवानी का अलौकिक शृंगार - फोटो : reporter

Sharad Navratri 2026: प्रकृति की गोद में अवस्थित सारण जिला के दिघवारा प्रखण्ड अंतर्गत आमी ग्राम में प्रतिष्ठित सिद्धपीठ माँ अंबिका भवानी का पवित्र प्रांगण शरदीय नवरात्र के इस पावन वेला में अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन चुका है। प्रत्यूष बेला के चतुर्थ प्रहर में ही प्रस्फुटित होने वाली घंटियों की प्रतिध्वनि, घ्राणेंद्रियों को तृप्त करने वाली धूप-दीप की सुगंध तथा दिग्दिगंत को गुंजायमान करने वाले माँ के जयघोष ने सम्पूर्ण परिसर को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया है। यहाँ की लोक-आस्था का यह चरमोत्कर्ष है कि प्रातःकाल की प्रथम आरती से लेकर महानिशा के अंचल तक अनवरत रूप से भक्तों का तांता लगा हुआ है। 

कोई आर्त और जिज्ञासु अपनी कुटुम्ब की सुख-समृद्धि की कामना लेकर उपस्थित हो रहा है, तो कोई अपनी मनोवांछित मन्नत की पूर्ति पर महामाया के चरणों में अपनी कृतज्ञता ज्ञापित कर रहा है।

महानिशा की वेला में होने वाला माँ का विशिष्ट शृंगार और आरती इस महाअनुष्ठान का मुख्य आकर्षण है। मल्लिका और पारिजात के पुष्पों, स्वर्ण-रजत आभूषणों तथा दिव्य अंगवस्त्रों से सुसज्जित भगवती का यह स्वरूप भक्तों के नेत्रों को शीतलता प्रदान करता है। मंदिर के प्रबुद्ध पुजारी राजेश उर्फ विट्ठल तिवारी एवं गणेश उर्फ चुनचुन तिवारी का कथन है कि आमी की यह सिद्धपीठ जन-जन की आस्था का मूर्छित नहीं अपितु जागृत प्रमाण है। 

साधक अपनी शारीरिक क्षमता, आरोग्यता और सामर्थ्य के अनुकूल उपवास रखकर भगवती की आराधना कर रहे हैं। नवरात्र का यह पावन पर्व मात्र अनुष्ठान नहीं, अपितु आत्मसंयम, अंतःकरण की शुद्धि और आध्यात्मिक साधना का सुअवसर है।

दूर-दूर से आने वाले आगंतुक इस पवित्र धाम में पहुंचकर सांसारिक संतापों से मुक्ति और भविष्य की उन्नति की प्रार्थना कर रहे हैं। माँ अंबिका भवानी का यह दरबार आबालवृद्ध सभी के लिए श्रद्धा, विश्वास और वात्सल्य का प्रगाढ़ प्रतीक बन चुका है, जहाँ हरभक्त कृतकृत्य होकर अपने जीवन को धन्य मान रहा है।

रिपोर्ट- धर्मेंद्र रस्तोगी