Bihar News : बिहार में बड़े भू-माफिया गिरोह का भंडाफोड़, मनरेगा का रोजगार सेवक निकला मास्टरमाइंड, अंचल कर्मियों की मिलीभगत से होता था फर्जीवाड़ा

Bihar News : बिहार में बड़े भू माफिया गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. इस मामले का मास्टरमाइंड मनरेगा का रोजगार सेवक निकला. वहीँ अंचल कर्मियों के स्न्न्लिप्त्ता की भी जांच की जा रही है.....पढ़िए आगे

भू माफिया गिरोह का पर्दाफाश - फोटो : RISABH

VAISHALI : बिहार पुलिस ने जमीन के फर्जीवाड़े और अवैध खरीद-फरोख्त के एक बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को दबोचा है जो जाली दस्तावेज तैयार कर जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) कराता था और फिर उसे ऊंचे दामों पर बेच देता था। गिरफ्तार मुख्य आरोपी कृष्ण नंदन पासवान मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड में मनरेगा के तहत 'पंचायत रोजगार सेवक' के पद पर कार्यरत है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी कृष्ण नंदन पासवान वैशाली जिले के लालगंज और बिदुपुर प्रखंड के अंचल कार्यालयों के कर्मियों से मिलीभगत कर इस खेल को अंजाम देता था। गिरोह का तरीका बेहद शातिराना था—सबसे पहले किसी जमीन के फर्जी कागजात तैयार किए जाते थे, फिर अंचल कार्यालय में सेटिंग के जरिए उन जाली दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज करा लिया जाता था। सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज होते ही यह गिरोह उस जमीन को किसी तीसरे पक्ष को बेचकर मोटी रकम वसूल लेता था।

पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बिदुपुर थाना क्षेत्र के भैरोपुर निवासी अमोद कुमार सिंह ने थाने में आवेदन दिया। पीड़ित ने बताया कि उनकी जमीन का फर्जी दस्तावेज बनाकर अंचल कार्यालय से दाखिल-खारिज करा लिया गया है और अब उसे बेचने की तैयारी चल रही है। हाजीपुर सदर-01 के एसडीपीओ सुबोध कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने रजिस्ट्री कार्यालय में संबंधित कागजातों का भौतिक सत्यापन कराया।

पुलिस जांच और रजिस्ट्री कार्यालय के सत्यापन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि दाखिल-खारिज के लिए जिस 'डीड' (दस्तावेज) का इस्तेमाल किया गया था, वह पूरी तरह फर्जी था। सरकारी रिकॉर्ड में उस नंबर का कोई डीड मौजूद ही नहीं था। इसके बावजूद, अंचल कर्मियों की संदिग्ध भूमिका के चलते उस फर्जी कागजात पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। पुलिस अब उन सरकारी कर्मियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इस भ्रष्टाचार में माफिया का साथ दिया।

एसडीपीओ सुबोध कुमार ने प्रेस को जानकारी देते हुए कहा कि पुलिस इस सिंडिकेट की गहराई तक जाने की कोशिश कर रही है। गिरफ्तार रोजगार सेवक से पूछताछ के आधार पर वैशाली और मुजफ्फरपुर के कई अन्य भू-माफियाओं और सरकारी बाबुओं के नाम सामने आने की संभावना है। पुलिस का कहना है कि यह एक अंतर-जिला गिरोह है जो भोले-भाले लोगों की जमीन हड़पने का संगठित धंधा चला रहा था। फिलहाल मुख्य आरोपी को जेल भेज दिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है। 

ऋषभ की रिपोर्ट