राघोपुर नाव हादसा: 13 मौतों के बाद भी उलझा सवाल-नाव सरकारी थी या प्राइवेट? डीएम के बयान पर ग्रामीणों का हंगामा

Raghopur Boat Tragedy: गंगा में समा गईं 13 जिंदगियां, अब नाव की मालिकाना हक को लेकर आमने-सामने प्रशासन और ग्रामीण! डीएम वर्षा सिंह ने बताया प्राइवेट नाव, ग्रामीणों का दावा-प्रखंड से मिली थी सरकारी नाव, सीओ पर मुकदमे की मांग से गरमाया मामला

Raghopur Boat Tragedy: वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी पर हुए दर्दनाक नाव हादसे ने 13 बच्चों की मौत से पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। मंगलवार रात करीब 8:30 बजे बच्चों से भरी नाव नदी में पलट गई। बताया गया कि बच्चे पास के गांव में भोज खाने जा रहे थे, तभी यह त्रासदी हो गई। हादसे के बाद जहां पीड़ित परिवारों के घरों में मातम पसरा है, वहीं अब नाव की वास्तविक स्थिति और उसके मालिकाना हक को लेकर प्रशासन तथा ग्रामीणों के बयानों में विरोधाभास सामने आया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हादसे का शिकार हुई नाव निजी थी या सरकारी?

डीएम का दावा-प्राइवेट थी नाव, ग्रामीण बोले-सरकारी नाव थी

वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह के मुताबिक, हादसे में शामिल नाव निजी थी और उस पर करीब 15 से 20 बच्चे सवार थे। उन्होंने बताया कि घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से बचाव अभियान शुरू किया गया। सात लोगों को सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए एनएमसीएच भेजा गया और उनकी हालत स्थिर बताई गई। दूसरी ओर, ग्रामीणों का दावा है कि दुर्घटनाग्रस्त नाव प्रखंड की ओर से उपलब्ध कराई गई थी और वह सरकारी नाव थी। इस विरोधाभास ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब हादसे में 13 बच्चों की जान चली गई, तब नाव की पहचान और उसकी जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना बेहद जरूरी है। 

जर्जर नाव की शिकायत का आरोप, फिर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

ग्रामीणों का आरोप है कि नाव पुरानी और जर्जर थी। दावा किया जा रहा है कि इसे बदलने के लिए कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह प्रशासनिक निगरानी और नाव परिचालन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।आखिर नाव की हालत की जांच किसकी जिम्मेदारी थी? यदि नाव सरकारी थी, तो उसके रखरखाव और परिचालन की जवाबदेही किस अधिकारी या विभाग पर थी? इन सवालों का जवाब जांच के जरिए सामने आना चाहिए।

सीओ पर हत्या के मुकदमे की मांग, डीएम के खिलाफ नारेबाजी

हादसे से नाराज ग्रामीणों ने संबंधित अंचलाधिकारी (सीओ) के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग उठाई। उनका आरोप है कि नाव बदलने की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने की जवाबदेही तय होनी चाहिए। विरोध के दौरान डीएम के खिलाफ नारेबाजी भी हुई और उन्हें वापस लौटना पड़ा। 

13 मौतों के बाद जवाबदेही तय करना जरूरी

राघोपुर की इस त्रासदी ने नदी पार करने वाले लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि नाव सरकारी थी या निजी, उसका संचालन कौन कर रहा था और सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई थी।

तेरह बच्चों की मौत केवल एक हादसे का आंकड़ा नहीं, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी में आया ऐसा मातम है जिसकी भरपाई संभव नहीं। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो, तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और लापरवाही साबित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।

रिपोर्ट- ऋषभ कुमार