Vaishali boat accident: एक ही घर से उठीं 7 अर्थियां,वैशाली के सीने में दफन हो गईं बच्चियों की सांसें, पंद्रह साल की चांदनी की जांबाजी जान कर हैरान हो जाएंगे आप

जिस्म पर मौत की चादर और गांव में खौफ का मंजर... वैशाली की लहरों ने आज हंसते-खेलते बचपन को हमेशा के लिए सुला दिया है।"

वैशाली के सीने में दफन हो गईं तेरह मासूम सांसें- फोटो : aditi

Vaishali boat accident:  वैशाली जिले के राघोपुर क्षेत्र में मंगलवार की वह काली रात अपने पीछे आंसुओं का ऐसा समंदर छोड़ गई है, जिसकी गहराई में इंसानियत का हर जमीर डूब रहा है। गंगा नदी के आगोश में समाई एक छोटी सी नाव ने उन तेरह मासूमों को लील लिया, जिनकी आँखों में अभी कल के सपने तैर रहे थे। तेरहवीं के भोज की खुशियों में शरीक होने निकले ये बच्चे क्या जानते थे कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। मंगलवार की रात करीब साढ़े आठ बजे का वह खौफनाक मंजर जब आंखों के सामने आता है, तो कलेजा कांप उठता है। पच्चीस से अधिक लोगों से भरी वह नाज़ुक नाव जब गंगा के थपेड़ों के बीच डगमगाई, तो चीख-पुकार के सिवाय कुछ न बचा। महज छह से अठारह साल की उम्र वाले ये बच्चे मौत के बेदर्द आगोश में समा गए।

मातम के साये में डूबा रामप्रवेश राय का आंगन

इस त्रासदी का सबसे दिल दहला देने वाला पहलू रामप्रवेश राय उर्फ राजा का परिवार है। जिस घर में कल तक बच्चों की खिलखिलाहट और आवाजें गूंजती थीं, आज वहां सिर्फ चीखें और मातम का सन्नाटा पसरा है। एक ही परिवार की सात फूल जैसी बच्चियों की अर्थियां जब एक साथ उठीं, तो पत्थर दिल इंसान की आंखें भी छलक उठीं। जिन हाथों में अभी कॉपियां और खिलौने होने चाहिए थे, वे कफन में लिपटे हुए थे। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है, उनकी सूनी आंखें अब बस उन खाली रास्तों को निहार रही हैं, जहां से कभी उनके लाल हंसते हुए लौटा करते थे।

पंद्रह साल की चांदनी की जांबाजी और अस्पतालों का दर्द

इस कोहराम के बीच पंद्रह साल की चांदनी कुमारी की रूहानी हिम्मत ने एक उम्मीद की किरण दिखाई। जब चारों तरफ मौत का तांडव चल रहा था, तब इस साहसी बेटी ने अपनी जान की परवाह किए बिना तैरकर अपने सगे भाइयों के बच्चों को मौत के मुंह से बाहर खींच लिया। चांदनी का वह संघर्ष आज भी इस बात की गवाही देता है कि इंसानियत की सांसें अभी बाकी हैं।

दूसरी ओर, पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मासूमों की सिसकियां हर किसी का दिल चीर रही हैं। एनएमसीएच के शिशुरोग विभागाध्यक्ष  डॉ. अखिलेश कुमार के मुताबिक, भर्ती बच्चों में से दो की हालत गंभीर बनी हुई है, जो सीवियर निमोनिया और सदमे से जूझ रहा है।

गंगा नदी में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन भले ही जारी हो, लेकिन जिन परिवारों ने अपनी दुनिया खो दी है, उनके लिए इस खामोशी को चीरने वाला अब कोई मरहम बाकी नहीं बचा। गांव में उठती एक के बाद एक अर्थियां आज इस बात का मातम मना रही हैं कि आखिर कब तक व्यवस्था की लापरवाही इन मासूमों की सांसों का सौदा करती रहेगी।

हीरेश कुमार