पीएचसी प्रभारी को रिश्वत लेते निगरानी की टीम ने रंगे हाथ किया गिरफ्तार, प्रधान सहायक और डेटा ऑपरेटर को भी हिरासत में लिया

बिहार में आए दिन घूसखोरी के मामले में सरकारी अधिकारियों की गिरफ्तारी के बावजूद इसका सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा। शुक्रवार को एकबार फिर निगरानी की टीम ने एक सरकारी अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है.....

पीएचसी प्रभारी रिश्वत लेते गिरफ्तार- फोटो : रिषभ कुमार

Vaishali : बिहार में एकबाऱ निगरानी ने भ्रष्ट सरकारी अधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। निगरानी की टीम ने वैशाली जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पटेढ़ी बेलसर में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी कामिनी प्रसाद को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान निगरानी की टीम ने पीएचसी के प्रधान सहायक धीरेंद्र कुमार और डेटा एंट्री ऑपरेटर हिमांशु कुमार को भी हिरासत में लिया है, जिन्हें पूछताछ के लिए साथ ले जाया गया है।


सीएचओ (CHO) जयपाल सिंह ने दर्ज कराई थी शिकायत

मामले की जानकारी देते हुए बताया गया है कि अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिश्रौलिया-अफजलपुर में पदस्थापित कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) जयपाल सिंह का पिछले तीन महीने से अधिक समय का इंसेंटिव भुगतान बकाया था। आरोप है कि बकाया इंसेंटिव की राशि जारी करने के बदले प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की जा रही थी। परेशान होकर सीएचओ ने इसकी लिखित शिकायत पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से की।


सादे लिबास में पहुंची टीम ने रंगे हाथों दबोचा

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की बात सत्य पाई गई। योजनाबद्ध तरीके से शुक्रवार को पटना से आई निगरानी की विशेष टीम ने सुबह से ही अस्पताल परिसर के आसपास सादे कपड़ों में घेराबंदी कर रखी थी। जैसे ही सीएचओ जयपाल सिंह ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के कार्यालय में जाकर रिश्वत की रकम सौंपी, पहले से सतर्क निगरानी टीम ने दबिश देकर कामिनी प्रसाद को रंगे हाथों धर दबोचा।


पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी

फिलहाल बरामद की गई घूस की कुल राशि का आधिकारिक विवरण स्पष्ट नहीं हो सका है। निगरानी की टीम गिरफ्तार पीएचसी प्रभारी सहित तीनों कर्मियों को अपने साथ पटना ले गई है, जहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


रिषभ की रिपोर्ट