Airlines News: अब एयरलाइंस खुद तय करेंगी हवाई टिकट के दाम ! सरकार ने घरेलू हवाई किरायों पर लगी सीमा हटाई, जानिए अब कितना महंगा होगा टिकट
Airlines News: सरकार ने हवाई किराए पर अपना नियंत्रण छोड़ दिया है और अब इसकी पूरी कमान एयरलाइंस कंपनियों के हाथ में होगी। अब तक सरकार तय करती थी कि एयरलाइंस आपसे कम से कम और ज्यादा से ज्यादा कितना किराया ले सकती हैं, लेकिन अब यह पाबंदी हटा ली गई है।
Airlines News: घरेलू विमानन क्षेत्र को लेकर सरकार ने एक बेहद अहम और बड़ा फैसला लिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू उड़ानों के किराए पर लगी 'प्राइस कैपिंग' को पूरी तरह से हटा दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब एयरलाइंस कंपनियां अपनी मर्जी और बाजार की मांग के हिसाब से हवाई टिकटों के दाम तय कर सकेंगी। सरकार के इस कदम से विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर आम यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है।
घरेलू हवाई किराया से हटा फेयर
दरअसल, नागर विमानन मंत्रालय ने घरेलू हवाई किरायों पर लगाई गई अस्थायी सीमा (फेयर कैप) को हटाने का फैसला किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था 23 मार्च 2026 से समाप्त कर दी जाएगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह सीमा 6 दिसंबर 2025 को लगाई गई थी, जब IndiGo की बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने के कारण टिकटों की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी हो गई थी। यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
एयरलाइंस को दी चेतावनी
फेयर कैप हटाने के साथ ही मंत्रालय ने एयरलाइंस कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे टिकट कीमतें तय करते समय पारदर्शिता और जिम्मेदारी बनाए रखें। किराया बाजार की स्थिति के अनुरूप हो और यात्रियों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। सरकार ने यह भी कहा है कि पीक सीजन, आपात स्थिति या उड़ान बाधित होने जैसी परिस्थितियों में अगर किराए में अनुचित बढ़ोतरी पाई गई, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रियल टाइम निगरानी जारी
मंत्रालय ने बताया कि किराया ट्रेंड की रियल टाइम निगरानी जारी रहेगी। डीजीसीए को पूरे विमानन सेक्टर पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। फेयर कैप लागू होने के दौरान अलग-अलग दूरी के लिए अधिकतम किराया 500 किमी तक 7,500 रुपये, 1,000 से 1,500 किमी (जैसे दिल्ली-मुंबई): 15,000 रुपये और 1,500 किमी से अधिक 18,000 रुपये तय किया गया था। इन सीमाओं से अधिक किराया वसूलने की अनुमति नहीं थी।
ईंधन कीमतों का असर
मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया है कि वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव, खासकर एयर टरबाइन फ्यूल (ATF) की लागत, हवाई किरायों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि सरकार यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि इसका असर यात्रियों पर न्यूनतम पड़े। जरूरत पड़ने पर भविष्य में फिर से किराया नियंत्रण जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।