धुआं-धुआं हुआ सिगरेट कंपनियों का मुनाफा: टैक्स के बोझ तले दबे ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स, क्या अब सस्ती सिगरेट का चलेगा दौर?

केंद्र सरकार द्वारा सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाए जाने के बाद तंबाकू कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मार्च में बिक्री में 5% की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स जैसे शेयरों में भारी बिकवाली देखी जा रही है।

Patna - केंद्र सरकार द्वारा सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Excise Duty) लगाने के फैसले का सीधा असर अब कंपनियों के बैलेंस शीट पर दिखने लगा है। इंफोर्मिस्ट (Informist) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण मार्च महीने में सिगरेट की बिक्री में 5% की गिरावट आई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अप्रैल में यह गिरावट और भी गहरी हो सकती है, क्योंकि उपभोक्ता बढ़ी हुई कीमतों के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं।

टैक्स का गणित: ₹55 तक बढ़े पैकेट के दाम

1 फरवरी 2026 से लागू हुए नए नियमों ने सिगरेट पीना काफी महंगा कर दिया है। सरकार ने उच्चतम 40% GST स्लैब के ऊपर ₹2,050 से ₹8,500 प्रति हजार स्टिक (लंबाई के आधार पर) की एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी है। इस भारी टैक्स के बोझ के चलते सिगरेट के 10 स्टिक वाले पैकेट की कीमतों में ₹22 से ₹55 तक का उछाल आया है, जिससे मांग में सीधे तौर पर कमी आई है।

स्टॉक मार्केट में कोहराम: ITC 17% से ज्यादा लुढ़का

टैक्स बढ़ोतरी की खबर और गिरती बिक्री के आंकड़ों ने निवेशकों को डरा दिया है। दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है:

  • ITC: बाजार का दिग्गज सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, शेयर 17.55% टूटकर ₹300 के स्तर पर पहुंच गया है। 
  • VST Industries : इसमें 11% की गिरावट दर्ज की गई है।
  • Godfrey Phillips : कंपनी के शेयर 10% तक गिर चुके हैं।


ITC के पास 'सुरक्षा कवच', अन्य कंपनियों की राह कठिन

विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियों के मुनाफे (Margins) पर गहरा असर पड़ेगा, लेकिन ITC इस संकट से उबरने में दूसरों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है।

  • ITC का फायदा: भले ही ITC के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में सिगरेट का योगदान 80% है, लेकिन इसका FMCG (Sunfeast, Bingo), एग्री-बिजनेस और पेपरबोर्ड सेगमेंट (कुल रेवेन्यू का 60%) एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।

  • गॉडफ्रे फिलिप्स की चुनौती: गॉडफ्रे फिलिप्स जैसी कंपनियां पूरी तरह तंबाकू उत्पादों पर निर्भर हैं। उनके पास पोर्टफोलियो में विविधता नहीं है, जिससे उन पर 'डाउन-ट्रेडिंग' (सस्ती सिगरेट की ओर मुड़ना) का सबसे बुरा असर पड़ेगा।