Bihar Bank: बिहार के 73 लाख लोगों की जिंदगी में बदलाव की इबारत लिख रहा एचडीएफसी का ऑपरेशन परिवर्तन, 34 ज़िलों में फैला सीएसआर का दायरा

भारत के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक यानी एचडीएफसी बैंक ने अपने सीएसआर विंग 'परिवर्तन' के माध्यम से बिहार की आबोहवा और यहाँ के बाशिंदों की ज़िंदगी में एक गहरा और सकारात्मक प्रभाव पैदा किया है।

एचडीएफसी बैंक का परिवर्तन विंग- फोटो : reporter

Bihar Bank:  भारत के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक यानी एचडीएफसी बैंक ने अपने सीएसआर विंग 'परिवर्तन' के माध्यम से बिहार की आबोहवा और यहाँ के बाशिंदों की ज़िंदगी में एक गहरा और सकारात्मक प्रभाव पैदा किया है। साल 2016 से राज्य में सक्रिय यह बैंक बिहार के कुल 38 में से 34 ज़िलों में अपनी मुकम्मल मौजूदगी दर्ज करा चुका है, जिसमें 13 आकांक्षी ज़िले और 6 आकांक्षी ब्लॉक भी शामिल हैं। इस मुहीम के ज़रिए अब तक लगभग 73 लाख लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया गया है, जो राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

छह बुनियादी स्तंभों पर टिकी है विकास की यह यात्रा

'परिवर्तन' कार्यक्रम के तहत बैंक ने मुख्य रूप से छह अहम क्षेत्रों पर अपना फोकस केंद्रित किया है। उनमें ग्रामीण विकास, शिक्षा को बढ़ावा देना, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका में सुधार, स्वास्थ्य सेवा और स्वच्छता, वित्तीय साक्षरता और समावेशन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन शामिल हैं।बिहार में पानी की किल्लत, मौसम के मिजाज में तब्दीली, बारिश पर निर्भर रहने वाली खेती, और रोज़गार के सीमित अवसरों जैसी जमीनी चुनौतियों से निपटने के लिए बैंक लगातार समुदायों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

कॉरपोरेट जगत की ज़िम्मेदारी और नुसरत पठान का विज़न

एचडीएफसी बैंक की सीएसआर हेड  नुसरत पठान का कहना है कि सीएसआर के लिए कोई एक ही पैमाना हर जगह लागू नहीं किया जा सकता। 'परिवर्तन' के ज़रिए हर इलाके की खास ज़रूरतों और चुनौतियों के मुताबिक प्रोग्राम डिज़ाइन किए जाते हैं। किसानों को टिकाऊ खेती में मदद करने से लेकर शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट तक, बैंक ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।वहीं, ईस्ट ब्रांच बैंकिंग हेड  अनिल खुगशाल ने इस बात पर जोर दिया कि बैंक पूरे बिहार में बैंकिंग सेवाओं की मुकम्मल रेंज मुमुहैया कराने के साथ-साथ आम अवाम के जीवन में सार्थक तब्दीली लाने के लिए भी संजीदा है।

विभिन्न क्षेत्रों में ज़मीनी स्तर पर हो रहे अभूतपूर्व कार्य

ग्रामीण विकास: अररिया, मधुबनी, सारण, पूर्वी चंपारण, भोजपुर, मुज़फ़्फ़रपुर, वैशाली और पश्चिमी चंपारण जैसे इलाकों में सोलर-पावर्ड सिंचाई, केमिकल-मुक्त प्राकृतिक खेती, वर्मीकम्पोस्टिंग और बायो-रिसोर्स सेंटर जैसी पहलों से किसानों की तकदीर बदल रही है।

स्किल और रोज़गार: 'प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन' के सहयोग से युवाओं को वोकेशनल ट्रेनिंग दी जा रही है। महिलाओं और युवाओं के नेतृत्व वाले एग्री-प्रक्रिया, टेक्सटाइल और बेकरी जैसे उद्यमों को बढ़ावा देकर ग्रामीण वैल्यू चेन को मजबूत किया जा रहा है।

हेल्थकेयर और हाइजीन: पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को संवारने के साथ-साथ डायलिसिस सेंटर, मैटरनिटी वार्ड, कैंसर स्क्रीनिंग और गया-समस्तीपुर में वेस्ट-मैनेजमेंट जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है।

वित्तीय साक्षरता: 'विजिल आंटी' जैसी पहलों के माध्यम से बिहार के 2.58 लाख से अधिक लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी (फाइनेंशियल फ्रॉड) और सुरक्षित बैंकिंग के प्रति जागरूक किया गया है।मार्च 2026 तक देश भर में सीएसआर कार्यक्रमों पर 1,316 करोड़ रुपए खर्च करने वाले एचडीएफसी बैंक का यह 'परिवर्तन' अभियान यह साबित करता है कि सच्ची तरक्की वही है जो समाज के आखिरी पायदान पर खड़े शख्स तक पहुँचे।