Diesel Price India: भारत में डीजल की मांग में तेज उछाल, 15 दिनों में 36.5 लाख टन की बिक्री

Diesel Price India: भारत में अक्टूबर के पहले 15 दिनों में सरकारी तेल कंपनियों की डीजल बिक्री 26.4% बढ़ी। जानें मांग बढ़ने की वजह, तेल कंपनियों का नुकसान और पेट्रोल-डीजल महंगे होने की संभावना।

Diesel Price India: देश में त्योहारों के मौसम के बीच डीजल की मांग तेजी से बढ़ी है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। ऐसे में सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। रॉयटर्स की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर के पहले 15 दिनों में सरकारी तेल कंपनियों ने 36.5 लाख मीट्रिक टन डीजल बेचा। यह सितंबर के इसी समय के मुकाबले 26.4 फीसदी और पिछले साल की समान अवधि से 25.4 फीसदी ज्यादा है।


इस बढ़ती मांग के बीच लोगों के मन में सवाल है कि क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं? फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी का कोई पक्का ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों पर दबाव और बढ़ सकता है।


अक्टूबर में क्यों बढ़ गई डीजल की मांग?


डीजल की खपत बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं। त्योहारों के कारण बाजार में सामान की मांग बढ़ती है। इससे ट्रकों और माल ढोने वाले वाहनों की आवाजाही तेज हो जाती है। कारोबारियों ने दीपावली के लिए सामान का स्टॉक जुटाना भी शुरू कर दिया है। कृषि क्षेत्र में भी डीजल की जरूरत बढ़ी है। खेतों में सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाले पंप और जनरेटर इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके अलावा बिजली की मांग बढ़ने पर भी कुछ जगहों पर डीजल जनरेटर चलाए जाते हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में ट्रकों की बिक्री अगस्त के मुकाबले 33.57 फीसदी बढ़कर 44,323 वाहनों तक पहुंच गई। इससे माल ढुलाई और ईंधन की मांग को सहारा मिला है।


तेल कंपनियों को हर लीटर पर करीब ₹20 का नुकसान


अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन महंगा होने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू बाजार में डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को डीजल की खुदरा बिक्री पर प्रति लीटर करीब 20 रुपये का नुकसान हो रहा है। निजी कंपनियों ने कुछ जगहों पर ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं। इससे सरकारी पेट्रोल पंपों पर डीजल अपेक्षाकृत सस्ता मिल रहा है और ग्राहक उनकी ओर जा रहे हैं। इस वजह से सरकारी कंपनियों की बिक्री में भी बढ़ोतरी हुई है।


क्या बढ़ेंगे पेट्रोल और डीजल के दाम?


अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, परिवहन खर्च और सरकारी कर जैसे कई कारक ईंधन की कीमतों को प्रभावित करते हैं। पश्चिम एशिया में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी आपूर्ति संबंधी चिंताओं ने भी तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है। 15 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 105.92 डॉलर प्रति बैरल था। अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और कंपनियों का नुकसान बढ़ता है, तो घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव आ सकता है। लेकिन पेट्रोल और डीजल के दाम कब बढ़ेंगे, यह अभी तय नहीं है। इसलिए कीमतों में जल्द बढ़ोतरी को पक्की खबर के बजाय संभावित स्थिति के रूप में देखना चाहिए।


आम लोगों पर क्या होगा असर?


डीजल महंगा होने पर ट्रकों से सामान ढोने की लागत बढ़ सकती है। इसका असर सब्जियों, अनाज और दूसरे जरूरी सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है। खेती में सिंचाई और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से किसानों और कारोबारियों का खर्च भी बढ़ सकता है। हालांकि, महंगाई कितनी बढ़ेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईंधन की कीमतों में कितना बदलाव होता है और कंपनियां बढ़ी लागत का कितना हिस्सा ग्राहकों पर डालती हैं।