23 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची महंगाई, खाने-पीने की कीमतों ने तोड़े रिकॉर्ड... त्योहारों में बड़ा झटका

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से 12 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.83 फीसदी थी। सितंबर में इसमें 0.71 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह पिछले 23 महीने में सर्वाधिक है

India Retail Inflation Rises- फोटो : news4nation

India Retail Inflation:  देश में महंगाई का दबाव बढ़ गया है। सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले 23 महीनों का उच्चतम स्तर है। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में तेजी को महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह माना जा रहा है। इससे आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने के साथ ब्याज दरों में कटौती की संभावना भी प्रभावित हो सकती है।


सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से 12 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.83 फीसदी थी। सितंबर में इसमें 0.71 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे पहले अक्टूबर 2024 में खुदरा महंगाई दर 6.21 फीसदी रही थी। वहीं, जनवरी 2026 में लागू नई सूचकांक श्रृंखला के आधार पर सितंबर की महंगाई दर अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।


खाद्य महंगाई बढ़कर 7.74 फीसदी हुई

उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) के आधार पर मापी जाने वाली खाद्य महंगाई दर अगस्त के 5.97 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 7.74 फीसदी हो गई। प्याज, लहसुन, अदरक और नींबू की कीमतों में तेजी ने खाद्य महंगाई का दबाव बढ़ाया। खाने-पीने की वस्तुओं के महंगे होने से आम परिवारों का खर्च बढ़ने की आशंका है।


गांवों में महंगाई का ज्यादा असर

सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर अगस्त के 5.24 फीसदी से बढ़कर 6.08 फीसदी हो गई। शहरी इलाकों में यह 4.31 फीसदी से बढ़कर 4.88 फीसदी दर्ज की गई। खाद्य महंगाई भी गांवों में 8.06 फीसदी रही, जबकि शहरों में यह 7.18 फीसदी दर्ज की गई।


आवास और कपड़े-जूते भी हुए महंगे

आंकड़ों के मुताबिक, आवास क्षेत्र की महंगाई दर अगस्त के 2.61 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 2.74 फीसदी हो गई। कपड़े और जूते-चप्पलों की महंगाई दर भी 3.56 फीसदी से बढ़कर 3.93 फीसदी पर पहुंच गई। MoSPI के अनुसार, महंगाई के आंकड़े 1,407 शहरी बाजारों और 1,465 गांवों से जुटाए गए कीमत संबंधी आंकड़ों पर आधारित हैं। इनमें ऑनलाइन बाजारों के आंकड़े भी शामिल हैं।


खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति पर भी असर पड़ सकता है। महंगाई का दबाव बना रहने पर ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला महंगाई के आगे के रुझान और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाएगा।