Middle East War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हूती नाकेबंदी का असर! क्या भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG गैस की कीमतें बढ़ेंगी?

Middle East War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हूती विद्रोहियों की समुद्री नाकेबंदी के ऐलान से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। जानिए इसका भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है।

Middle East War: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ने लगा है, जिससे दुनिया भर के तेल बाजारों पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। इस स्थिति का प्रभाव भारत समेत कई देशों में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो आने वाले दिनों में ईंधन महंगा हो सकता है। हाल ही में यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद तेल और अन्य जरूरी सामानों की समुद्री सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यदि जहाजों की आवाजाही में रुकावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

लाल सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य सामान विभिन्न देशों तक पहुंचाया जाता है। सऊदी अरब का यानबू बंदरगाह भी इसी क्षेत्र में स्थित है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल का निर्यात होता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता है। हूती विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने यह कदम सऊदी अरब की कार्रवाई के जवाब में उठाया है। उनका आरोप है कि सऊदी अरब ने उनके बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं। विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं बदली गई, तो वे और कड़े कदम उठा सकते हैं।

बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट का रोल

बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचता है। यदि इस मार्ग पर खतरा बढ़ता है, तो तेल की ढुलाई प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारत पर भी पड़ सकता है। यदि कच्चा तेल महंगा होता है, तो पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा नहीं

फिलहाल पेट्रोल-डीजल या गैस की कीमतों में किसी नई बढ़ोतरी की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।