Nicotine Pouch Ban: युवाओं में तेजी से बढ़ रहा निकोटीन पाउच का चलन, जानें क्या है और कितना खतरनाक
Nicotine Pouch Ban: निकोटीन पाउच युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। जानें निकोटीन पाउच क्या हैं, भारत में इनके लिए क्या नियम हैं और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इन्हें लेकर क्यों चिंतित हैं।
Nicotine Pouch Ban: युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे तंबाकू-मुक्त निकोटीन पाउच को लेकर सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। इन पाउच में तंबाकू नहीं होता, लेकिन इनमें निकोटीन मौजूद रहता है। इसे सीधे होंठ और मसूड़े के बीच रखा जाता है और निकोटीन मुंह की अंदरूनी परत के जरिए शरीर में पहुंचता है।
केंद्र सरकार पहले ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ई-सिगरेट और दूसरे निकोटीन डिलीवरी उत्पादों की बिक्री, विज्ञापन और ऑनलाइन कारोबार पर रोक को सख्ती से लागू करने के निर्देश दे चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की जनवरी 2025 की एडवाइजरी में राज्यों और UTs से ई-सिगरेट, वेप और ऐसे दूसरे निकोटीन डिलीवरी उपकरणों की बिक्री, निर्माण, वितरण, आयात और विज्ञापन पर रोक लागू कराने को कहा गया था।
निकोटीन पाउच क्या होते हैं?
निकोटीन पाउच छोटे-छोटे पैकेट होते हैं। इन्हें होंठ और मसूड़े के बीच रखा जाता है। इनमें आमतौर पर निकोटीन, फ्लेवर और दूसरे पदार्थ होते हैं, लेकिन तंबाकू की पत्ती नहीं होती। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इन पाउच से निकोटीन मुंह की अंदरूनी परत के जरिए शरीर में पहुंचता है। तंबाकू न होने की वजह से इन उत्पादों को कई बार सिगरेट या दूसरे तंबाकू उत्पादों के विकल्प के तौर पर पेश किया जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इनमें मौजूद निकोटीन सुरक्षित है। WHO ने चेतावनी दी है कि निकोटीन बहुत ज्यादा नशे की लत लगाने वाला पदार्थ है और बच्चों, किशोरों तथा युवाओं के लिए खास चिंता का विषय है।
युवाओं में बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता
WHO ने मई 2026 में निकोटीन पाउच के तेजी से बढ़ते वैश्विक कारोबार पर चिंता जताई थी। संगठन के अनुसार, 2024 में दुनिया भर में इनकी खुदरा बिक्री 23 अरब यूनिट से ज्यादा पहुंच गई थी और एक साल में इसमें 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी। WHO ने यह भी कहा कि कई देशों में इन उत्पादों पर नियम अभी सीमित हैं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए इन उत्पादों की मार्केटिंग युवाओं तक पहुंचने का एक जरिया बन सकती है। इसी वजह से स्वास्थ्य एजेंसियां केवल पारंपरिक दुकानों ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन बिक्री पर भी निगरानी बढ़ाने की बात कर रही हैं।
भारत में निकोटीन उत्पादों पर क्या नियम हैं?
भारत में ई-सिगरेट और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम पर Prohibition of Electronic Cigarettes Act, 2019 के तहत रोक है। स्वास्थ्य मंत्रालय के National Tobacco Control Programme की वेबसाइट पर इस कानून को देश के तंबाकू नियंत्रण से जुड़े प्रमुख कानूनों में शामिल किया गया है।
इसके अलावा FSSAI के नियमों में तंबाकू और निकोटीन को खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल करने पर रोक है। हालांकि, हर निकोटीन उत्पाद को सिर्फ इसी नियम के आधार पर ई-सिगरेट कानून के तहत रखना सही नहीं होगा। किसी खास निकोटीन पाउच की कानूनी स्थिति उसके इस्तेमाल, संरचना, लेबल और संबंधित कानूनों पर निर्भर कर सकती है, इसलिए निकोटीन पाउच को लेकर “भारत में हर तरह का निकोटीन पाउच पूरी तरह अवैध है” जैसी बात को बिना संबंधित सरकारी आदेश या उत्पाद की कानूनी श्रेणी देखे सामान्य रूप से कहना सही नहीं होगा।
दिल और दिमाग पर क्या असर पड़ सकता है?
निकोटीन शरीर में पहुंचने के बाद लत पैदा कर सकता है। WHO के अनुसार, बच्चों, किशोरों और युवाओं के विकसित हो रहे दिमाग पर निकोटीन का असर खास चिंता का विषय है। तंबाकू और निकोटीन से जुड़े उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर हृदय और दूसरे स्वास्थ्य जोखिमों पर भी लगातार अध्ययन होते रहे हैं। निकोटीन पाउच में तंबाकू नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि ये स्वास्थ्य के लिए नुकसान रहित हैं। खासकर ऐसे युवाओं के लिए जो पहले किसी निकोटीन उत्पाद का इस्तेमाल नहीं करते हैं, इनसे निकोटीन की आदत शुरू होने की चिंता जताई गई है।
भारत में तंबाकू से हर साल लाखों मौतें
WHO के भारत संबंधी एक अध्ययन के मुताबिक, देश में तंबाकू के इस्तेमाल से हर साल करीब 13.5 लाख लोगों की रोकी जा सकने वाली मौतें होती हैं। इसी अध्ययन के अनुसार, 2017-18 में तंबाकू से जुड़ी बीमारी और समय से पहले होने वाली मौतों की आर्थिक लागत भारत की GDP के करीब 1 फीसदी के बराबर थी। ऐसे में नए निकोटीन उत्पादों का युवाओं के बीच बढ़ना स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए एक अलग चुनौती बन रहा है। सरकार पहले से लागू तंबाकू और ई-सिगरेट नियमों के तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजारों की निगरानी और कार्रवाई पर जोर दे रही है।