RBI Gold Reserve: PM मोदी की जनता से सोना कम खरीदो की अपील, लेकिन RBI क्यों बढ़ा रहा गोल्ड रिजर्व?

RBI Gold Reservel: PM मोदी की सोना कम खरीदने की अपील और RBI के बढ़ते गोल्ड रिजर्व के पीछे क्या है वजह? जानिए पूरी आर्थिक रणनीति।

“गोल्ड पर RBI का भरोसा- फोटो : freepik

RBI Gold Reserve: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से सोना कम खरीदने की अपील की है। दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI लगातार अपने सोने का भंडार बढ़ा रहा है। पहली नजर में यह बात विरोधाभासी लग सकती है कि आम जनता को सोना कम खरीदने को कहा जा रहा है, लेकिन देश का केंद्रीय बैंक खुद सोना खरीद रहा है। हालांकि इसके पीछे देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी बड़ी रणनीति है।

भारत के पास मौजूद सोने का भंडार तेजी से बढ़ा है। सितंबर 2025 में RBI के पास 794.64 मीट्रिक टन सोना था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 880.52 मीट्रिक टन हो गया। अगर लंबे समय की बात करें तो साल 2000 में भारत के पास करीब 357 टन सोना था, जो अब ढाई गुना से ज्यादा हो चुका है।

168 मीट्रिक टन सोना वापस भारत लाया गया

RBI सिर्फ नया सोना नहीं खरीद रहा, बल्कि विदेशों में रखा अपना सोना भी भारत वापस ला रहा है। पहले भारत का काफी सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसी विदेशी तिजोरियों में रखा जाता था। मार्च 2023 में करीब 437 टन सोना विदेश में था, लेकिन मार्च 2026 तक यह घटकर 197.67 टन रह गया। यानी करीब 168 मीट्रिक टन सोना वापस भारत लाया गया। अब भारत के कुल सोने का लगभग 77 प्रतिशत हिस्सा मुंबई और नागपुर की तिजोरियों में रखा गया है।

RBI ऐसा क्यों कर रहा है?

RBI ऐसा क्यों कर रहा है, इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला कारण सुरक्षा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों ने रूस की विदेशी संपत्तियों पर रोक लगा दी थी। इसके बाद कई देशों ने समझा कि अपना सोना अपने देश में रखना ज्यादा सुरक्षित है। दूसरा कारण 1991 का आर्थिक संकट है, जब भारत को विदेशी मुद्रा की कमी के कारण अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था। अब भारत ऐसी स्थिति दोबारा नहीं चाहता। तीसरा कारण खर्च बचाना है। विदेशों में सोना रखने पर कस्टडी और इंश्योरेंस पर काफी पैसा खर्च होता है।

महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है

अब सवाल उठता है कि अगर सोना इतना जरूरी है तो प्रधानमंत्री लोगों से इसे कम खरीदने की अपील क्यों कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि RBI का सोना और आम लोगों का खरीदा गया सोना दोनों अलग चीजें हैं। जब लोग बाजार से सोना खरीदते हैं, तो भारत को विदेशों से डॉलर देकर सोना आयात करना पड़ता है। वित्त वर्ष 2026 में भारत ने करीब 72 बिलियन डॉलर का सोना आयात किया, जो कुल आयात बिल का लगभग 10 प्रतिशत था। ज्यादा सोना आयात होने से देश का डॉलर बाहर जाता है। इससे रुपया कमजोर हो सकता है और महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर लोग फिजिकल गोल्ड यानी गहने और सोने की ईंटें कम खरीदें, तो देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होगा।

प्रधानमंत्री की अपील का असर शेयर बाजार में भी दिखा

प्रधानमंत्री की अपील का असर शेयर बाजार में भी दिखा। खबर आने के बाद ज्वेलरी कंपनियों के शेयर गिर गए। Titan के शेयर में करीब 6 प्रतिशत, Kalyan Jewellers में 8 प्रतिशत और Senco Gold में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। निवेशकों को डर है कि अगर लोग सोना कम खरीदेंगे तो इन कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है। हालांकि यह मानना मुश्किल है कि भारत में लोग पूरी तरह सोना खरीदना बंद कर देंगे। शादी-ब्याह और त्योहारों में सोने की परंपरा बहुत मजबूत है। जानकारों का कहना है कि सरकार लोगों को जरूरी मौकों पर सोना खरीदने से नहीं रोक रही, बल्कि ज्यादा निवेश के लिए फिजिकल गोल्ड खरीदने से बचने की सलाह दे रही है।

सोने में निवेश के दूसरे तरीके अपनाएं

सरकार चाहती है कि लोग सोने में निवेश के दूसरे तरीके अपनाएं, जैसे गोल्ड बॉन्ड या डिजिटल गोल्ड। इससे लोगों का पैसा भी सुरक्षित रहेगा और देश को ज्यादा सोना आयात नहीं करना पड़ेगा। सीधी भाषा में समझें तो RBI सोना इसलिए खरीद रहा है ताकि देश की आर्थिक सुरक्षा मजबूत रहे। वहीं सरकार चाहती है कि आम लोग जरूरत से ज्यादा सोना खरीदकर देश पर विदेशी मुद्रा का बोझ न बढ़ाएं। यानी RBI का सोना देश की सुरक्षा कवच है, जबकि ज्यादा निजी सोना आयात फिलहाल अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है।