दारोगा की पत्नी के साथ यौनशोषण और ब्लैकमैलिंग करना सीनियर आईपीएस को पड़ा भारी, सरकार ने किया सस्पेंड

सरकार ने सीनियर IPS रतन लाल डांगी को सस्पेंड कर दिया है। उन पर एसआई की पत्नी से यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग और आपत्तिजनक फोटो वायरल होने के गंभीर आरोप हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

N4N Desk - : छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उनके कुछ कथित आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने और गंभीर नैतिक कदाचार के आरोपों के बाद की गई है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अधिकारी का यह आचरण एक लोक सेवक की गरिमा के विपरीत है।

महिला ने लगाए थे यौन उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग के आरोप

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब एक महिला ने नवंबर महीने में रतन लाल डांगी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायतकर्ता महिला एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी है। महिला ने आईपीएस डांगी पर यौन उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग जैसे संगीन आरोप लगाए थे। शिकायत के बाद से ही यह मामला प्रशासनिक और गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ था, जिस पर अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।

सेवा नियमों और पेशेवर मर्यादाओं का उल्लंघन

राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि प्रारंभिक जांच में रतन लाल डांगी का व्यवहार 'अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968' के प्रतिकूल पाया गया है। उन पर अपने पद के प्रभाव का दुरुपयोग करने और सामाजिक व पेशेवर मर्यादाओं को ताक पर रखने का आरोप है। सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों के सार्वजनिक होने से पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई है, जिसे सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है।

विभागीय जांच शुरू, नवा रायपुर मुख्यालय किया गया तय

निलंबन की अवधि के दौरान रतन लाल डांगी का मुख्यालय नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) तय किया गया है। नियमों के मुताबिक, उन्हें इस दौरान जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, लेकिन वे बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। सरकार ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि मामले की तह तक जाया जा सके।

प्रशासनिक अनुशासन की दिशा में सख्त संदेश

आईपीएस डांगी पर की गई इस कार्रवाई को छत्तीसगढ़ सरकार के प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के संकल्प के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस सेवा की गरिमा और जनता के विश्वास को बहाल करने के लिए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है। वर्तमान में विभागीय जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में और भी कड़ी कानूनी या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।