Bihar Crime: आरटीओ दफ्तर के खजाने में सेंध, सरकारी कोष में पहुंचने से पहले गायब हो गया 69 लाख रुपए, खुलासे से मचा हड़कंप
Bihar Crime: मोटर वाहन-कर के नाम पर वसूले गए 69 लाख 11 हजार 698 रुपए की रकम सरकारी खाते तक पहुंचने से पहले ही गायब हो गई।....
Bihar Crime: जिला परिवहन कार्यालय में सरकारी ख़ज़ाने को जिस बेखौफ तरीके से चूना लगाया गया, उसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। भोजपुर में मोटर वाहन-कर के नाम पर वसूले गए 69 लाख 11 हजार 698 रुपए की रकम सरकारी खाते तक पहुंचने से पहले ही “गायब” हो गई। इस सनसनीखेज गबन का आरोप जिला परिवहन कार्यालय के नाजिर अजय कुमार सिंह पर लगा है। जिला परिवहन पदाधिकारी अमित कुमार रंजन की शिकायत पर आरा शहर के नवादा थाना में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
आरोपी अजय कुमार सिंह कैमूर जिले के दुमदुम गांव का रहने वाला है और मेघनाथ सिंह का पुत्र बताया जा रहा है। फिलहाल उसकी पदस्थापना भोजपुर जिला परिवहन कार्यालय में थी, लेकिन वह कई दिनों से ड्यूटी से फरार है। बिना किसी सूचना के गैरहाजिरी ने पहले ही उसके इरादों पर शक की स्याही पोत दी थी, और अब विभागीय जांच ने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया है।
एफआईआर के मुताबिक अजय कुमार सिंह पहले जिला परिवहन कार्यालय में डेटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहा था। इसी दौरान उसे लोक सेवा का अधिकार काउंटर पर नकद में मोटर वाहन-कर संग्रह करने की जिम्मेदारी मिली। जांच में पाया गया कि उसने ₹69,11,698 की राजस्व राशि सरकारी खाते में जमा नहीं की। यह रकम महीनों तक लंबित रही। विभाग ने 9 दिसंबर 2025 और 2 जनवरी 2026 को उसके स्थायी पते पर नोटिस भेजकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। साफ चेतावनी दी गई कि जवाब नहीं मिलने पर इसे गबन माना जाएगा। लेकिन अजय की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। यही खामोशी उसके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गई।
बताया जा रहा है कि अजय रोजाना दफ्तर में बैठकर वाहन चालकों और वाहन मालिकों का तीन से चार लाख रुपए तक का चालान काटता था। चालान की यह मोटी रकम सरकारी खजाने में जाने के बजाय निजी जेब का रास्ता पकड़ लेती थी। यह सिलसिला करीब छह महीने तक बेरोकटोक चलता रहा। जब सासाराम में अजय के खिलाफ पहले से दर्ज एक गबन मामले की खबर सामने आई, तब आरा कार्यालय में भी जांच तेज हुई और परत-दर-परत पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया।
जिला परिवहन पदाधिकारी अमित कुमार रंजन के मुताबिक, नाजिर के पद पर बैठा अजय कुमार सिंह राजस्व वसूली की पूरी कमान संभाले हुए था। उसे भरोसेमंद मानकर किसी ने शक नहीं किया। जून 2024 में उसकी तैनाती हुई थी और एक साल तक उसकी गतिविधियां सामान्य रहीं। जनवरी 2025 से जून 2025 के बीच उसने लाखों की सरकारी राशि हड़प ली। पटना मुख्यालय से जब लगातार दबाव बढ़ा और नजारत में रकम जमा नहीं मिली, तब जाकर मामला फूटा।
अब सवाल यह है कि इतने बड़े गबन के दौरान निगरानी तंत्र कहां सोया रहा? क्या यह सिर्फ एक नाजिर की करतूत है या सिस्टम की मिलीभगत? पुलिस जांच शुरू हो चुकी है, लेकिन इस घोटाले ने सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट- आशीष कुमार