Bihar Excise Case: महिला दारोगा पुष्पा कुमारी के गंदे खेल का हो गया खुलासा, 5 करोड़ के रिसॉर्ट से लेकर फर्जी केस, बिहार में खाकी के पीछे खूनी खेल!

Bihar Excise Case: नालंदा जिले में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने सनसनीखेज मोड़ ले लिया है।...

महिला दारोगा पुष्पा कुमारी के गंदे खेल का हो गया खुलासा- फोटो : X

Bihar Excise Case: नालंदा जिले में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। जिस घटना को शुरुआती दौर में शराब तस्करों की ओर से की गई हत्या से जोड़कर देखा जा रहा था, पुलिस जांच में उसमें विभागीय टीम के भीतर ही गोली चलने की बात सामने आई है। इस मामले में मद्य निषेध विभाग की महिला दारोगा पुष्पा कुमारी समेत सात आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपितों के खिलाफ मामले से जुड़े साक्ष्य मिटाने और अधिकारियों को गुमराह करने के आरोपों की जांच की जा रही है।जांच में सामने आए तथ्यों ने उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि घटना के बाद सच्चाई छिपाने के लिए दूसरी कहानी पेश करने की कोशिश की गई।

शराब तस्करी का पीछा करते वक्त चली गोली, अपने ही सिपाही की हुई मौत

घटना 14 अक्टूबर की रात की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, पटना से आई उत्पाद पुलिस की टीम झारखंड की ओर से आ रही शराब लदी एक गाड़ी का पीछा कर रही थी। इसी दौरान महिला दारोगा पुष्पा कुमारी के निर्देश पर होमगार्ड जवान रिशु कुमार ने अपनी राइफल से फायरिंग की।आरोप है कि इसी फायरिंग के दौरान निकली एक गोली उत्पाद सिपाही अजीत कुमार के सिर के पिछले हिस्से में लग गई। गोली लगने से सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इस घटना को लेकर सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।शुरुआत में शराब तस्करों पर हत्या का संदेह जताया जा रहा था, लेकिन पुलिस की जांच में विभागीय टीम के भीतर से गोली चलने की बात सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई।

सच छिपाने के लिए कहानी गढ़ने का आरोप, सात गिरफ्तार

पुलिस जांच के मुताबिक, सिपाही की मौत के बाद घटना की वास्तविक परिस्थितियों को छिपाने और वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास किए जाने का आरोप है। इसी सिलसिले में महिला दारोगा पुष्पा कुमारी समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।आरोपितों पर सबूत मिटाने और घटना से जुड़े तथ्यों को छिपाने की कोशिश करने के आरोप हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गोली चलने की घटना के बाद किसकी क्या भूमिका रही और कथित तौर पर सच्चाई छिपाने की कोशिश में कौन-कौन शामिल था।

10 लोगों के गिरोह और अवैध वसूली के आरोपों की भी चर्चा

इस मामले में महिला दारोगा पर एक कथित गिरोह चलाने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। आरोप है कि इस गिरोह के जरिए शराब तस्करी, अवैध वसूली और लोगों को फर्जी मामलों में फंसाने जैसे काम किए जाते थे। इसके अलावा, राजगीर में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से रिसॉर्ट बनाने की कथित योजना का भी जिक्र किया जा रहा है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामले में अवैध कमाई और संपत्ति के स्रोत की जांच भी अहम हो सकती है। फिलहाल, रिसॉर्ट की योजना, कथित गिरोह की गतिविधियों और संपत्ति से जुड़े दावों को जांच के जरिए सत्यापित किया जाना जरूरी है।

एसआईटी की जांच पर टिकी नजर, कई सवालों के जवाब बाकी

उत्पाद सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले में अब कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। गोली किन परिस्थितियों में चली, घटना के बाद वास्तविक जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाने में क्या हुआ और कथित तौर पर सबूत मिटाने की कोशिश में किसकी भूमिका थी इन सभी बिंदुओं पर जांच जारी है।

सात आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद मामला और गंभीर हो गया है। हालांकि, गिरफ्तारी अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करती। अंतिम निष्कर्ष जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।इस पूरे प्रकरण ने बिहार के उत्पाद विभाग में जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब एसआईटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सिपाही अजीत कुमार की मौत की पूरी परिस्थितियां क्या थीं और कथित साजिश या साक्ष्य छिपाने के आरोपों में किसकी क्या भूमिका रही।