शराबबंदी की आड़ में काली कमाई का खेल, एक्साइज इंस्पेक्टर के ठिकानों पर EOU का धावा, 87 लाख की नौकरी में करोड़ों की दौलत का खुलासा

Bihar Excise Inspector Raided Assets Far Exceed Income बिहार में शराबबंदी लागू कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे एक्साइज इंस्पेक्टर अंकेश कुमार गोंड अब खुद भ्रष्टाचार के शिकंजे में फंस गए हैं। ...

शराबबंदी की आड़ में एक्साइज इंस्पेक्टर का काली कमाई का खेल,- फोटो : social Media

Bihar Excise Inspector Raided Assets Far Exceed Income बिहार में शराबबंदी लागू कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे एक्साइज इंस्पेक्टर अंकेश कुमार गोंड अब खुद भ्रष्टाचार के शिकंजे में फंस गए हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने 9 जुलाई को सीवान, पटना और मुंगेर स्थित उनके पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर कथित तौर पर अकूत संपत्ति और संदिग्ध लेन-देन का खुलासा किया। जांच एजेंसी का आरोप है कि शराब माफियाओं पर नकेल कसने के बजाय इंस्पेक्टर ने उनसे सांठगांठ कर शराबबंदी को ही काली कमाई का सबसे बड़ा ज़रिया बना लिया।

EOU की जांच के मुताबिक अंकेश कुमार गोंड के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने शराब तस्करों, अवैध शराब कारोबारियों और माफियाओं को संरक्षण देकर हर महीने मोटी रकम वसूली। जांच में यह भी सामने आया कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से आने वाली शराब की खेप को बिहार में प्रवेश दिलाने के बदले कथित तौर पर नियमित उगाही की जाती थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इंस्पेक्टर ने कथित तौर पर अपनी काली कमाई को छिपाने के लिए पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां और वाहन खरीदे। बहनोई के नाम से खरीदी गई स्कॉर्पियो को विभाग में किराए पर लगाकर सरकारी भुगतान लिया गया, जबकि शराब के साथ जब्त एक टेंपो को ससुर के नाम पर नीलामी में खरीदकर व्यावसायिक इस्तेमाल करने के दस्तावेज भी जांच टीम के हाथ लगे हैं।

EOU के मुताबिक वर्ष 2005 में ASI के रूप में नौकरी शुरू करने वाले अंकेश की अब तक की कुल वैध आय करीब 87 लाख रुपये रही, जबकि उनके पास 2.36 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति मिली है, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 202 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। जांच में मुंगेर की दो मंजिला व्यावसायिक इमारत, पटना के दानापुर स्थित आलीशान मकान और अन्य संपत्तियों पर बिना बैंक ऋण के भारी नकद निवेश के भी संकेत मिले हैं।

छापेमारी के दौरान सीवान स्थित किराए के आवास से विभाग की सरकारी पिस्टल और कारतूस भी बरामद हुए, जिन्हें नियमों के विपरीत घर में रखा गया था। वहीं कार्रवाई के समय इंस्पेक्टर किसी भी ठिकाने पर मौजूद नहीं मिले। जांच में यह भी सामने आया कि वे बिना स्वीकृत अवकाश के ड्यूटी से गायब थे और उनका अंतिम मोबाइल लोकेशन मुंगेर में मिला। अब जांच की नजर पटना के दानापुर स्थित एसबीआई शाखा में मौजूद उनके बैंक लॉकर पर है, जिसे फ्रीज कर दिया गया है। EOU की मौजूदगी में लॉकर खोला जाएगा और उसके भीतर रखी संपत्ति, दस्तावेज और अन्य सामान की बारीकी से जांच होगी। अधिकारियों का मानना है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में अभी कई और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।