Bihar Alcohol Party:शराबबंदी वाले बिहार में डॉक्टर साहब छलका रहे जाम, रसूख का नशा भारी, कौन करेगा इनका इलाज ?
Bihar Alcohol Party: बिहार में शराबबंदी का कानून भले ही कागजों पर सख्त हो, लेकिन हकीकत के गलियारों में इसकी हिफाजत करने वालों पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।
Bihar Alcohol Party: बिहार में शराबबंदी का कानून भले ही कागजों पर सख्त हो, लेकिन हकीकत के गलियारों में इसकी हिफाजत करने वालों पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। जहानाबाद से सामने आए एक कथित वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवालिया निशान लगा दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि सदर अस्पताल से जुड़े एक डॉक्टर और कुछ कर्मचारी ऐसी महफिल में नजर आ रहे हैं, जहां जाम छलक रहे हैं और शराबबंदी कानून को ठेंगा दिखाने का आरोप लगाया जा रहा है।
वायरल वीडियो में कुछ लोग एक जगह बैठे दिखाई दे रहे हैं। टेबल पर खाने-पीने का सामान रखा है और हाथों में गिलास नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इनमें जहानाबाद सदर अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि वीडियो की सत्यता, समय और स्थान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन वायरल क्लिप ने जिले की सियासत से लेकर स्वास्थ्य महकमे तक में खलबली मचा दी है।
जिस महकमे के कंधों पर लोगों की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी है, अगर उसी महकमे के कुछ लोगों पर कानून की धज्जियां उड़ाने का इल्जाम लगे तो सवाल उठना लाजिमी है। मरीजों को अनुशासन, संयम और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाने वाले अगर खुद ही नियमों के कटघरे में खड़े दिखाई दें, तो भरोसे का इलाज कौन करेगा?
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है। शराब का सेवन, बिक्री और भंडारण कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में अगर वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि कानून की नजर में गंभीर मामला बन सकता है।
वायरल वीडियो के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस महकमे की कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही साफ होगा कि वीडियो में दिख रहे लोग कौन हैं, मामला कब और कहां का है और आरोपों में कितनी सच्चाई है। लेकिन फिलहाल इस कथित वीडियो ने कई सवालों को जन्म दे दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आम आदमी के लिए शराबबंदी कानून का शिकंजा कसा हुआ है, तो क्या रसूखदार लोगों के लिए कोई अलग रास्ता खुला है? अगर आरोप बेबुनियाद हैं तो जांच से तस्वीर साफ हो जाएगी, लेकिन अगर वीडियो में सच्चाई है तो कार्रवाई की कसौटी पर प्रशासन को भी खरा उतरना होगा। क्योंकि कानून की लाठी अगर कमजोर दिखी, तो शराबबंदी का पूरा ढांचा सवालों के घेरे में आ जाएगा।
रिपोर्ट- विक्रमादित्य कुमार