Bihar Crime: मोबाइल मिस्त्री ने बनाया फर्जी पेमेंट ऐप, ऐसे कारोबारियों को फंसाया जाल में, पुलिस भी हैरान

Bihar Crime: एक मोबाइल मिस्त्री ने तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसा फर्जीवाड़ा खड़ा किया कि बड़े-बड़े मोबाइल कारोबारियों को भी अपने जाल में फंसा लिया।...

मोबाइल मिस्त्री की करतूत- फोटो : reporter

Bihar Crime: मुजफ्फरपुर में एक मोबाइल मिस्त्री ने तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसा फर्जीवाड़ा खड़ा किया कि बड़े-बड़े मोबाइल कारोबारियों को भी अपने जाल में फंसा लिया। आरोप है कि मोबाइल रिपेयरिंग का काम करने वाले मनीष कुमार ने फर्जी पेमेंट ऐप तैयार किया और WhatsApp कॉल के जरिए मोबाइल टूल्स कारोबारियों से माल बुक कराने लगा। भुगतान के नाम पर वह फर्जी पेमेंट का स्क्रीनशॉट भेजता था और कारोबारी उसके झांसे में आकर लाखों रुपये का मोबाइल सामान भेज देते थे।

मामला तब खुला, जब शहर के मोबाइल टूल्स कारोबारी भाग्य भूषण, जो क्राउन फोल्डर दुकान के संचालक बताए गए हैं, ने साइबर पुलिस से शिकायत की। उन्होंने पुलिस को बताया कि WhatsApp नंबर से संपर्क कर एक लाख रुपये से अधिक के मोबाइल फोल्डर बुक किए गए और फर्जी भुगतान का स्क्रीनशॉट भेजकर माल हासिल कर लिया गया।

शिकायत मिलते ही साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार की टीम सक्रिय हुई। पुलिस ने शिकायत में मिले मोबाइल नंबर और फर्जी पेमेंट ऐप से जुड़े तकनीकी सुरागों को खंगालना शुरू किया। करीब आठ घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस टीम मोतीपुर निवासी कथित मास्टरमाइंड मनीष कुमार तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि मनीष पहले मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था। इसी दौरान उसने मोबाइल की तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए फर्जी पेमेंट ऐप तैयार किया। इसके बाद बड़े मोबाइल कारोबारियों को WhatsApp कॉल कर सामान बुक कराया जाता और भुगतान के नाम पर फर्जी स्क्रीनशॉट भेज दिया जाता था।

आरोप है कि इस तरीके से सामान हासिल करने के बाद मनीष ने अपना गिरोह खड़ा कर लिया। फर्जी भुगतान के जरिए मंगाए गए मोबाइल टूल्स को छोटे दुकानदारों को कम कीमत में बेचकर मुनाफा कमाया जाता था। पुलिस ने मनीष की निशानदेही पर गिरोह के कथित सदस्य रिमझिम कुमार और मोबाइल टूल्स खरीदने वाले राजेपुर ओपी क्षेत्र के दुकानदार परवेज आलम को भी गिरफ्तार किया है।

साइबर पुलिस ने आरोपितों के पास से 5 मोबाइल फोन और 188 मोबाइल फोल्डर बरामद किए हैं। बरामद मोबाइल फोल्डरों की अनुमानित कीमत करीब 1.10 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और फर्जीवाड़े के तरीके की पड़ताल कर रही है।साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के अनुसार, कारोबारी की शिकायत के बाद टीम ने तकनीकी जांच के जरिए गिरोह तक पहुंच बनाई और कार्रवाई की। अब पुलिस इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा