Bihar Police: मुख्यमंत्री के गृह जिले में थानेदार की गुंडई कैमरे में कैद, बाल पकड़कर महिला की पिटाई, वीडियो ने उधेड़ी वर्दी की इज़्जत, सरकार देखिए खाकी का खौफनाक सच, देख लीजिए सम्राट चौधरी की पुलिस का वीडियो
सीएम के गृह जिला में कानून का पहरेदार ही कानून को रौंदता नजर आया। वीडियो में थानाध्यक्ष वर्दी की हनक दिखाते हुए एक महिला के बाल पकड़कर घसीटते और उसे थप्पड़ जड़ते साफ दिख रहे हैं।....
Bihar Police: बिहार में सुशासन और महिला सम्मान के बड़े-बड़े दावों के बीच नालंदा से आई यह तस्वीर किसी चार्जशीट से कम नहीं है। थरथरी थाना क्षेत्र में कानून का पहरेदार ही कानून को रौंदता नजर आया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में थरथरी थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंघानिया वर्दी की हनक दिखाते हुए एक महिला के बाल पकड़कर घसीटते और उसे थप्पड़ जड़ते साफ दिख रहे हैं। यह मंजर न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि खाकी की मर्यादा पर सीधा हमला है।
मामला उस वक्त का है जब थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंघानिया पुलिस बल के साथ रामवचन गोप (पिता स्व. शिवनंदन प्रसाद) को न्यायालय के आदेश पर गिरफ्तार करने पहुंचे थे। गिरफ्तारी के दौरान परिजनों और मोहल्ले की महिलाओं ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। कानून कहता है कि ऐसी स्थिति में महिलाओं से निपटने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को आगे किया जाए, लेकिन यहां नियम-किताब को ताक पर रखकर थानेदार खुद मैदान में कूद पड़े और वह भी लाठी या कानून से नहीं, बल्कि बाल खींचकर और थप्पड़ों से।
वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि कैसे थानाध्यक्ष संयम खो बैठते हैं। खाकी, जो सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है, वही खाकी यहां खौफ का हथियार बन गई। महिला की चीखें, आसपास की अफरा-तफरी और पुलिस की बेरुखी सब कुछ कैमरे में कैद है। यह कोई बंद कमरे की कहानी नहीं, बल्कि सरेआम हुई ऐसी हरकत है जिसने पुलिसिया रवैये की पोल खोल दी है। वीडियो की पुष्टि न्यू4नेसन नहीं करता है।
एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महिलाओं के सशक्तिकरण और सम्मान की बात करते हैं, दूसरी ओर ऐसे अफसर सरकार के दावों को कटघरे में खड़ा कर देते हैं। थानाध्यक्ष अपनी सफाई में कह रहे हैं कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस टीम पर हमला करने की कोशिश की गई थी। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी कथित हमले का जवाब एक महिला के बाल पकड़कर पीटना हो सकता है? क्या कानून की किताब में यह तरीका कहीं दर्ज है?
वीडियो सामने आते ही इलाके में गुस्सा भड़क उठा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर थानेदार ही गुंडागर्दी पर उतर आए, तो आम आदमी इंसाफ की आस किससे लगाए? अब निगाहें जिले के वरीय पुलिस अधिकारियों पर टिकी हैं। देखना यह है कि इस खाकी वाले गुंडे पर सिर्फ बयानबाज़ी होगी या फिर कोई ठोस कार्रवाई भी होगी। क्योंकि अगर इस बार भी मामला रफा-दफा हुआ, तो यह सिर्फ एक महिला की पिटाई नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की हार मानी जाएगी।
रिपोर्ट- राज पाण्डेय