विश्व धरोहर परिसर में गंदा काम, रक्षकों और पर्यटकों में चले लात-घूंसे, संगीन आरोपों से गर्माया पारा

Bihar Crime: बिहार की अस्मिता और ज्ञान की ऐतिहासिक धरोहर, विश्व प्रसिद्ध प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का खंडहर परिसर आज उस वक़्त सियासत और सुर्ख़ियों का केंद्र बन गया...

विश्व धरोहर परिसर में गंदा काम- फोटो : reporter

Bihar Crime: बिहार की अस्मिता और ज्ञान की ऐतिहासिक धरोहर, विश्व प्रसिद्ध प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का खंडहर परिसर आज उस वक़्त सियासत और सुर्ख़ियों का केंद्र बन गया, जब वहाँ संस्कृति की धज्जियां उड़ती दिखाई दीं। पर्यटकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई हिंसक झड़प ने महकमे की मुस्तैदी और अवाम की संजीदगी, दोनों पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस पूरे हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसने सूबे के अमन-चैन और कानून-व्यवस्था के दावों को एक बार फिर कटघरे में ला खड़ा किया है।

मामला महज़ एक मामूली झड़प का नहीं, बल्कि तल्ख़ बयानों और संगीन इल्ज़ामोंका सियासी अखाड़ा बन चुका है। घटना की तफ़्सील के मुताबिक, घायल सुरक्षा गार्ड संजय कुमार (निवासी सकरौल, दीपनगर) का दावा है कि उन्होंने ड्यूटी के दौरान कुछ नौजवानों को परिसर की मर्यादा के ख़िलाफ़ गंदा काम करने से मना किया था। गार्ड का आरोप है कि इस नसीहत से भड़के रसूख़दार पर्यटकों ने अपने गुर्गों और साथियों को बुलाकर उन पर लात-घूंसों की बौछार कर दी। बीच-बचाव के बाद ज़ख्मी गार्ड को इलाज के लिए सदर अस्पताल में दाख़िल कराया गया है।

दूसरी तरफ़, इस पूरे ड्रामे में उस वक़्त एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ आ गया जब पर्यटकों की तरफ़ से सुरक्षाकर्मियों पर ही एक युवती के साथ बदसलूकी और छेड़छाड़ का संगीन इल्ज़ाम मढ़ दिया गया। वायरल वीडियो में चीखती-चिल्लाती आवाज़ें इस पूरे मामले को एक नया सियासी रंग दे रही हैं, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

स्थानीय प्रशासन और नालंदा थाना अध्यक्ष इस मामले में फूंक-फूंक कर क़दम रख रहे हैं। पुलिसिया तंत्र का कहना है कि अब तक किसी भी पक्ष की तरफ़ से कोई आधिकारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। लेकिन अवाम में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि ज्ञान की इस पवित्र धरती को इस तरह के ओछे विवादों से बदनाम क्यों किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि खाकी इस पूरे मामले की तह तक जाकर असली गुनाहगारों को बेनक़ाब करती है, या फिर यह मामला भी सियासी बयानों की भेंट चढ़कर ठंडे बस्ते में चला जाता है।

रिपोर्ट- राज पाण्डेय