Bihar Crime: अफसर की हत्या के 12 घंटे में कहानी का पूरा ट्विस्ट, फायरिंग से एनकाउंटर तक, पढ़िए अपराध और सत्ता के बीच गेम रूल बदलने की पूरी स्टोरी

Bihar Crime: नगर परिषद कार्यालय के भीतर नकाबपोश बदमाशों की एंट्री हुई और फिर शुरू हुई गोलियों की बेरहम तड़तड़ाहट। हवा में बारूद की गंध फैल गई और चंद सेकंड में पूरा दफ्तर जंग के मैदान में बदल गया। ...

अपराध और सत्ता के बीच गेम रूल - फोटो : reporter

Bihar Crime: भागलपुर की धरती एक बार फिर गोलियों की गूंज और सियासी गरमाहट से कांप उठी है। सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में जो खून-खराबा हुआ, उसने न सिर्फ एक प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया, बल्कि पूरे बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। यह कोई साधारण वारदात नहीं थी यह एक ऐसा क्राइम ड्रामा था, जिसमें सत्ता, सियासत और अपराध का खतरनाक संगम खुलकर सामने आया।

मंगलवार की शाम… वक्त था आम सा, लेकिन मंजर अचानक कयामत बन गया। नगर परिषद कार्यालय के भीतर नकाबपोश बदमाशों की एंट्री हुई और फिर शुरू हुई गोलियों की बेरहम तड़तड़ाहट। हवा में बारूद की गंध फैल गई और चंद सेकंड में पूरा दफ्तर जंग के मैदान में बदल गया। कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार को सीधा निशाना बनाया गया और मौके पर ही उनकी सांसों की डोर टूट गई। वहीं सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू गंभीर रूप से घायल होकर जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे। इस वारदात ने साफ कर दिया कि अपराधियों के हौसले अब कानून से भी आगे निकल चुके थे। हर तरफ सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा था क्या बिहार में अपराध का नया गेम रूल लिख दिया गया है?

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई… असली ड्रामा तो इसके बाद शुरू हुआ। पुलिस ने इस पूरे केस में तेजी दिखाते हुए महज 12 घंटे के भीतर मास्टरमाइंड रामधनी यादव तक अपनी पहुंच बना ली। बुधवार सुबह जैसे ही पुलिस टीम ने छापेमारी की, हालात फिर से गरम हो गए। रामधनी यादव ने खुद को घिरता देख पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की आवाज से एक बार फिर इलाका दहल उठा और इस मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।

लेकिन इस बार कहानी का अंत पहले जैसा नहीं था। पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई में रामधनी यादव को मौके पर ही ढेर कर दिया। कुछ ही पलों में पूरा घटनाक्रम एक एनकाउंटर ड्रामा में तब्दील हो गया, जिसने पूरे राज्य को झकझोर दिया। इस एनकाउंटर के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा “बिहार में कानून का राज है… पहले अपराधियों को पैर में गोली लगती थी, लेकिन अब अगर पुलिस पर हमला होगा तो कलेजा पर फटाफट गोली चलेगी।” उनके इस बयान ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया। सत्ता पक्ष इसे कड़ा संदेश बता रहा है, जबकि विपक्ष लगातार कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है और इसे एनकाउंटर कल्चर करार दे रहा है।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह एनकाउंटर बिहार में अपराधियों के लिए एक नई चेतावनी बनेगा? क्या वाकई अब सिस्टम जीरो टॉलरेंस की नीति पर उतर आया है या यह सिर्फ एक सियासी बयानबाजी का हिस्सा है? भागलपुर की इस खौफनाक वारदात ने एक बात तो साफ कर दी है कानून और अपराध के बीच की लड़ाई अब सिर्फ थानों और अदालतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सीधे सड़क पर, गोलियों के बीच लड़ी जा रही है और फिलहाल… इस पूरे क्राइम ड्रामे के बाद बिहार एक बार फिर उसी सवाल पर खड़ा है क्या वाकई अब गेम रूल बदल चुका है?

रिपोर्ट- अंजनी कुमार कश्यप