पटना हाई कोर्ट ने भारत में नकली नोटों के सरगना को दिया बड़ा झटका, पाकिस्तान से नेपाल तक कनेक्शन

पटना हाई कोर्ट ने नकली नोटों से जुड़े एक मामले में आरोपी को बड़ा झटका दिया है. दरअसल, पाकिस्तान और नेपाल के रास्ते भारत में फैलाए जा रहे फेक नोटों के नेटवर्क में NIA ने बड़ी कार्रवाई है

Patna High Court- फोटो : news4nation

Patna High Court : पटना हाईकोर्ट ने 'पाकिस्तान-नेपाल के रास्ते भारत में फैलाया जा रहा था नकली नोटों का जाल' के मामले में एनआई के आरोपी की ज़मानत याचिका को रद्द किया। हाईकोर्ट ने जाली भारतीय करेंसी के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट पर कड़ा रुख अपनाया है।पाकिस्तान और नेपाल के रास्ते भारत में नकली नोटों की बड़ी खेप सप्लाई करने वाले गिरोह के आरोपी मोहम्मद वारिस को बड़ा झटका देते हुए हाईकोर्ट ने उसकी ज़मानत याचिका को साफ़ तौर पर रद्द कर दिया है।  


ये बिना नंबर प्लेट की बाइक और ₹1.95 लाख के जाली नोट का मामला मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) के बंजरिया थाना क्षेत्र का है। गुप्त सूचना के आधार पर जब पुलिस ने NH-28A पर खरवा पुल के पास नाकाबंदी की, तो बिना नंबर की लाल बाइक पर सवार तीन संदिग्धों को दबोचा गया।  


जब पुलिस ने इनकी तलाशी ली, तो होश उड़ गए! आरोपी मोहम्मद वारिस, मोहम्मद नज़र सद्दाम और मोहम्मद ज़ाकिर हुसैन की जेबों और बैग से 500-500 रुपये के कुल 390 जाली नोट (₹1,95,000 की जाली करेंसी) बरामद किए गए।  'पाकिस्तान से नेपाल और फिर कश्मीर' तक नेटवर्क फैला था।


पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत में नकली नोट लाते थे। इसके बाद इस जाली नोटों की खेप को दिल्ली होते हुए जम्मू-कश्मीर में बैठे सरफराज उर्फ मुज़फ्फर अहमद तक पहुँचाया जाता था।  


मामले की संवेदनशीलता और देश की सुरक्षा से जुड़े होने के कारण इसकी जाँच गृह मंत्रालय के निर्देश पर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को सौंप दी गई थी।  पटना हाइकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ज़मानत का सवाल ही नही उठता हैं। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा हैं।