Bihar Crime: 25 साल तक कानून से आंख-मिचौली के बाद चारा घोटाले का आरोपी गिरफ्तार , स्टेशन पर CBI ने ऐसे दबोचा

Bihar Crime: कानून के लंबे हाथों से बचने की उम्मीद में करीब 25 साल तक फरारी काटने वाले चारा घोटाले के आरोपी सत्येंद्र कुमार की आखिरकार गिरफ्तारी हो गई।...

आंख-मिचौली के बाद चारा घोटाले का आरोपी गिरफ्तार- फोटो : X

Bihar Crime: कानून के लंबे हाथों से बचने की उम्मीद में करीब 25 साल तक फरारी काटने वाले चारा घोटाले के आरोपी सत्येंद्र कुमार की आखिरकार गिरफ्तारी हो गई। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो  ने गुरुवार देर रात उसे लखनऊ रेलवे स्टेशन से दबोच लिया। कभी नेपाल में ठिकाना बनाने तो कभी गिरफ्तारी से बचने की जुगत में लगे आरोपी की फरारी का सिलसिला अब थम गया है। वर्षों से लंबित इस मामले में गिरफ्तारी ने एक बार फिर साफ कर दिया कि मुकदमे की फाइल पुरानी जरूर हो सकती है, लेकिन जांच एजेंसी की नजर से बचना आसान नहीं।

2001 में चार्जशीट, फिर शुरू हुआ फरारी का दौर

सत्येंद्र कुमार के खिलाफ वर्ष 2001 में चारा घोटाले से जुड़े मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इसके बाद वह अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार चलने लगा। लगातार गैरहाजिरी के कारण उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। इतने लंबे अरसे तक आरोपी के हाथ नहीं आने से कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने में भी अड़चन बनी रही।

अब गिरफ्तारी के बाद उम्मीद है कि संबंधित मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ सकेगी। हालांकि, आरोपी पर लगे आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

नेपाल से गुना और फिर लखनऊ तक पहुंची जांच

जानकारी के मुताबिक, सीबीआई को तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के जरिए पता चला कि सत्येंद्र कुमार नेपाल में रह रहा था। इसी बीच उसके भारत लौटने की जानकारी मिली। बताया गया है कि 22 अक्टूबर को वह मध्य प्रदेश के गुना से लखनऊ जाने वाली ट्रेन में सवार हुआ।

पुख्ता खुफिया इनपुट मिलने के बाद सीबीआई ने विशेष टीम गठित की। टीम ट्रेन के लखनऊ पहुंचने से पहले ही रेलवे स्टेशन पर तैनात हो गई। जैसे ही ट्रेन स्टेशन पहुंची, अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई दिखाती है कि पुराने मामलों में भी तकनीकी निगरानी, मानवीय खुफिया जानकारी और विभिन्न राज्यों के बीच तालमेल अहम भूमिका निभाते हैं।

ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले गई सीबीआई

गिरफ्तारी के बाद सीबीआई आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले गई है। वहां उसे संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा, जहां चारा घोटाले से जुड़े मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी। करीब ढाई दशक तक फरार रहने वाले आरोपी की गिरफ्तारी से लंबित मुकदमों को आगे बढ़ाने की राह खुल सकती है। लंबे समय तक कानून से बचते रहने के बावजूद आखिरकार सत्येंद्र कुमार जांच एजेंसी की पकड़ में आ गया।

पुरानी फाइल, लेकिन जांच का पीछा जारी

इस गिरफ्तारी का सबसे अहम पहलू यह है कि वर्षों पुराने मामले में भी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा। फरार आरोपियों की तलाश में समय लग सकता है, लेकिन स्थायी वारंट और लंबित मुकदमों के रहते कानूनी प्रक्रिया समाप्त नहीं हो जाती। अब निगाहें रांची की अदालत में होने वाली अगली कार्रवाई पर रहेंगी। सत्येंद्र कुमार की गिरफ्तारी के बाद मामले की सुनवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से तय होगा।