Patna Crime:राजधानी में खुलेआम खौफ का खेल, सरकार के दावों की धज्जियां उड़ाते सीटू शाह के गुर्गे, पत्रकार और परिवार पर सरेआम हमला, दहशत में इलाके के लोग

Patna Crime: राजधानी पटना में कानून का इकबाल कमजोर और बदमाशों का हौसला बुलंद दिख रहा है। अगमकुआं थाना क्षेत्र से सामने आया ताजा मामला इस बात की तस्दीक करता है कि अपराधी अब बेखौफ हैं और पुलिस महज जल्द गिरफ्तारी का पुराना राग अलापने तक सीमित है।...

राजधानी में पत्रकार और परिवार पर सरेआम हमला- फोटो : reporter

Patna Crime: बिहार में सरकार चाहे जितने दावे कर ले कि अपराध पर लगाम कस दी गई है, लेकिन जमीन पर हालात इसके ठीक उलट नजर आते हैं। राजधानी पटना में कानून का इकबाल कमजोर और बदमाशों का हौसला बुलंद दिख रहा है। अगमकुआं थाना क्षेत्र से सामने आया ताजा मामला इस बात की तस्दीक करता है कि अपराधी अब बेखौफ हैं और पुलिस महज जल्द गिरफ्तारी का पुराना राग अलापने तक सीमित है।

सोमवार की देर शाम एक पत्रकार अभिषेक आनंद को सिर्फ इस बात की सजा दी गई कि उन्होंने बीच सड़क पर माल लोड करा रहे एक दुकानदार से गाड़ी साइड करने को कहा। ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में गोदाम के पास पिकअप (Registration No: BR01GL-0269) को सड़क के बीचोबीच खड़ा कर माल लोड कराया जा रहा था, जिससे पीछे गाड़ियों की लंबी कतार लग गई। अभिषेक और उनके पिता ने शालीनता से गाड़ी हटाने की बात कही, लेकिन गोदाम मालिक सीटू शाह और उसके साथ मौजूद लोगों का मिजाज अचानक बदल गया।

पहले गाली-गलौज, फिर धक्का-मुक्की और देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि सीटू शाह ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर पत्रकार को बीच सड़क पर ही पीटना शुरू कर दिया। अभिषेक उस वक्त अपनी बच्ची को डॉक्टर को दिखाकर परिवार के साथ घर लौट रहे थे। लेकिन बात यहीं नहीं थमी।

शाम ढलते-ढलते सीटू शाह, जितेंद्र, चंदन और करीब 10 लोगों का हुजूम पत्रकार के घर पर आ धमका। घर के बाहर गालियों की बौछार, फिर अभिषेक और उनके पिता पर मुक्कों की बरसात। हमले में अभिषेक के चेहरे से खून की धार बहने लगी। जाते-जाते दबंगों ने मुहल्लेवालों को खुली धमकी दी-“जो भी हमारे खिलाफ बोलेगा, उसकी भी पिटाई होगी।”

इस वारदात से पूरा इलाका दहशत में है। लोगों का कहना है कि सीटू शाह की गुंडागर्दी कोई नई बात नहीं, इससे पहले भी वह मुहल्ले में आतंक मचा चुका है। पीड़ित और स्थानीय लोगों ने अगमकुआं थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें सीटू शाह, जितेंद्र, चंदन और उनके गुर्गों के नाम शामिल हैं।

एक तरफ बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी अपराधियों को राज्य से खदेड़ने का दावा करते हैं, दूसरी तरफ राजधानी में सरकार की नाक के नीचे ऐसे कथित सफेदपोश गुंडे सरेआम कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। अब देखना यह है कि पुलिसिया कार्रवाई सिर्फ फाइलों तक सीमित रहती है या वाकई सीटू शाह जैसे लोगों पर कानून का शिकंजा कसता है। फिलहाल सवाल यही है क्या कानून का खौफ लौटेगा या खौफ का कानून यूं ही चलता रहेगा?