Shambhu Girls Hostel: NEET छात्रा मौत मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष का FSL ने लिया ब्लड सैंपल, अब तक 11 लोगों के लिए जा चुके हैं नमूने , DNA से खुल सकती क्रूर साज़िश की पोल

फॉरेंसिक लैब ने NEET छात्रा मौत मामले में नया मोड़ देते हुए हॉस्टल मालिक मनीष रंजन सहित 11 लोगों के ब्लड सैंपल लिए हैं।

शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष का FSL ने लिया ब्लड सैंपल- फोटो : reporter

Shambhu Girls Hostel: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के साथ हुए रेप और मौत के सनसनीखेज मामले ने पूरे प्रदेश की नींद उड़ा दी है। फॉरेंसिक लैब  ने इस कांड में नया मोड़ देते हुए हॉस्टल मालिक मनीष रंजन सहित 11 लोगों के ब्लड सैंपल लिए हैं। इनमें छात्रा के परिवार के पांच लोग और छह अन्य संदिग्ध शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, छात्रा की उम्र से जुड़े प्रमाण पत्र के मुताबिक वह नाबालिग थी, जिसके चलते अब इस केस में पोक्सो एक्ट की धारा जोड़ने की तैयारी चल रही है।

FSL की जांच में छात्रा के कपड़ों से स्पर्म पाया गया है। 10 जनवरी को छात्रा के परिवार ने पुलिस को कपड़े सौंपे थे, जिनकी फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट दो दिन पहले SIT को सौंपी गई थी। DNA टेस्ट के लिए अब सभी संदिग्धों के सैंपल लिए जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस वीभत्स कांड में कौन शामिल था। PMCH की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने भी यौन हिंसा की आशंका की पुष्टि की है।

इस बीच प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉ. सतीश सिंह ने खुली धमकी दी है। उन्होंने कहा, “कलयुग का अभिमन्यु हूं, एक-एक का दरवाजा खोलूंगा और जमीन में गाड़ कर नेस्तनाबूत कर दूंगा।” उनका यह बयान 26 जनवरी को हॉस्पिटल कैंपस में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान वीडियो में रिकॉर्ड हुआ। वीडियो में डॉ. सतीश ने स्पष्ट किया कि हॉस्पिटल किसी दबाव में काम नहीं करेगा और किसी की साजिश बेनकाब होगी।

इस कांड की जांच में लापरवाही उजागर होने पर दो थानेदार चित्रगुप्त नगर की रौशनी कुमारी और कदमकुंआ के हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे मामले में सख्त रुख अपनाया और प्रदेश के डीजीपी, एडीजी, एसएसपी और पूरी SIT को तलब किया। SIT अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी, जिसके कारण CID को भी मामले में एंट्री दी गई। रविवार को CID की टीम हॉस्टल पहुंची और दो घंटे की जांच-पड़ताल के बाद वापस लौट गई।

पूरा मामला यह दर्शाता है कि प्रदेश की सुरक्षा और जांच एजेंसियों पर नज़र रखने की जरूरत कितनी गंभीर है। छात्रा के परिजनों की आवाज़, FSL की जांच और पुलिस की कार्रवाई के बीच, यह केस अब राज्य की न्यायिक और कानून व्यवस्था की परीक्षा बन गया है। DNA की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस क्रूर और शातिराना कांड में कौन-कौन जिम्मेदार है।

यह मामला सिर्फ़ अपराध की तह तक जाने का नहीं है, बल्कि समाज के भीतर व्याप्त असुरक्षा, लापरवाही और शक्ति के दुरुपयोग की काली तस्वीर को भी उजागर करता है।