15 साल पुराना थप्पड़ और 16 चोरियां: पुलिस से बदला लेने के लिए सिर्फ 'खाकी' को ही बनाया निशाना
लिस लाइन में हुई चोरी का खुलासा करते हुए पुलिस ने एक ऐसे चोर को गिरफ्तार किया जो सिर्फ पुलिसकर्मियों के घरों को निशाना बनाता था. आरोपी दीपेश ने बताया कि 15 साल पहले हुई मारपीट का बदला लेने के लिए वह ऐसा कर रहा था.
पुलिस ने एक ऐसे शातिर चोर को गिरफ्तार किया है, जिसने केवल पुलिसकर्मियों के घरों को निशाना बनाने की जिद पाल रखी थी। आरोपी दीपेश कुमार ने पूछताछ में खुलासा किया कि करीब 15 साल पहले एमपी के खंडवा में अलीराजपुर में एक पुलिसकर्मी ने उसकी जमकर पिटाई की थी। उसी अपमान और मारपीट का बदला लेने के लिए उसने कसम खाई थी कि वह केवल पुलिसवालों के घर ही सेंध लगाएगा। अपनी इसी 'प्रतिज्ञा' को पूरा करने के लिए उसने एक-दो नहीं, बल्कि विभिन्न जिलों में पुलिस आवासों को निशाना बनाया।
सब्जीवाला बनकर रेकी और वारदात
दीपेश की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। वह सीधे चोरी करने के बजाय पहले पुलिस लाइन या पुलिस कॉलोनियों में सब्जी बेचने वाला बनकर दाखिल होता था। इस दौरान वह ऐसे घरों की पहचान करता था जो बंद पड़े होते थे। रेकी पूरी होने के बाद वह रात के अंधेरे में अपने साथियों के साथ वारदात को अंजाम देता था। खंडवा पुलिस लाइन में भी उसने इसी तरह कांस्टेबल करणपाल सिंह और सुरेश खाते के घरों से 30 हजार रुपये नकद और कीमती गहने पार कर दिए थे।
फरार होने की कोशिश और गिरफ्तारी
20 जनवरी को हुई चोरी के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दीपेश की पहचान की। उसकी तलाश में झाबुआ, अलीराजपुर और धार में छापेमारी की गई। जब पुलिस ने उसे बुरहानपुर के पास घेराबंदी कर पकड़ने की कोशिश की, तो उसने भागने के लिए एक घर की छत से छलांग लगा दी। इस प्रयास में वह गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
16 मामलों का खुलासा और अन्य साथियों की तलाश
पुलिस जांच में सामने आया है कि दीपेश पर मध्य प्रदेश के इंदौर, खरगोन, धार, और बड़वानी सहित कई जिलों में कुल 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से अधिकांश वारदातें पुलिसकर्मियों के घरों में ही की गई थीं। खंडवा की चोरी में उसके साथ रमेश और भूरलिया नाम के दो अन्य आरोपी भी शामिल थे, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अब दबिश दे रही है। 15 साल पुराने एक थप्पड़ का बदला लेने के लिए शुरू हुआ यह सिलसिला आखिरकार सलाखों के पीछे खत्म हुआ।