Bihar Hooch Tragedy: बिहार में देसी शराब पीने से फिर मौत, शराबबंदी के साए में चल रहा था मौत का धंधा, अब शव को कब्ज़े में लेकर पुलिस ने जांच की शुरू
Bihar Hooch Tragedy:Bihar Hooch Tragedy: बिहार में पूर्ण शराबबंदी क़ानून की तख़्तियां हर चौराहे पर टंगी हैं, मगर रोज़ाना कहीं न कहीं देसी ज़हर की खेप उतरती है, गिलास उठते हैं और फिर लाशें गिरती हैं।
Bihar Hooch Tragedy: बिहार में पूर्ण शराबबंदी क़ानून की तख़्तियां हर चौराहे पर टंगी हैं, मगर ज़मीनी हक़ीक़त किसी संगीन वारदात से कम नहीं। रोज़ाना कहीं न कहीं देसी ज़हर की खेप उतरती है, गिलास उठते हैं और फिर लाशें गिरती हैं। सरकार कहती है धंधेबाज़ों पर नकेल कसी जा रही है, लेकिन सीवान, छपरा, गया, मुज़फ्फरपुर से लेकर समस्तीपुर तक मौत की ख़बरें थमने का नाम नहीं लेतीं। लीपापोती होती है, बयान आते हैं, कुछ दिन शोर रहता है और फिर मामला ठंडे बस्ते में अगली मौत तक।
ताज़ा क़िस्सा समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड से सामने आया है। गांवपुर पंचायत के वार्ड संख्या 13 में कथित तौर पर देसी शराब पीने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान सन्नी ठाकुर (करीब 35 वर्ष) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सन्नी देसी शराब का सेवन कर रहा था, तभी अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह वहीं ज़मीन पर ढेर हो गया। जब तक लोग कुछ समझ पाते, सांसें थम चुकी थीं।
घटना की खबर फैलते ही गांव में हड़कंप मच गया। घर में मातम पसरा है, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव वालों की जुबान पर एक ही सवाल जब शराबबंदी है तो देसी ज़हर पहुंच कैसे रहा है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में अवैध देसी शराब की बिक्री लंबे अरसे से धड़ल्ले से चल रही है, मगर कार्रवाई काग़ज़ों तक सिमटी रहती है। जिन हाथों में हथकड़ी होनी चाहिए, वही हाथ परदे के पीछे से धंधे को हांकते नज़र आते हैं ऐसा इलाक़े में चर्चा है।
बता दें बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद बीते 9 सालों के भीतर जहरीली शराब से 190 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सीवान, भोजपुर, बक्सर , सारण, गया और गोपालगंज जिले में सबसे ज्यादा जहरीली शराब पीने से लोगों की जानें गई हैं। हालांकि, यह सरकारी आंकड़ा है।
सूचना मिलते ही उजियारपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्ज़े में लेकर जांच शुरू की। पुलिस का कहना है कि हर एंगल से पड़ताल की जा रही है शराब कहां से आई, किसने बेची, किसने आंखें मूंदी। मगर गांव की फिज़ा में भरोसे से ज़्यादा डर तैर रहा है। लोग कहते हैं जांच होगी, बयान आएंगे, फिर सब शांत।
शराबबंदी के दावे और देसी ज़हर की हक़ीक़त के बीच फंसा यह मामला एक बार फिर वही सवाल उछालता है क़ानून का खौफ किसे है? जब तक सप्लाई चेन टूटेगी नहीं और धंधेबाज़ों पर असली शिकंजा नहीं कसेगा, तब तक हर गांव किसी अगली मौत का इंतज़ार करता रहेगा।
रिपोर्ट-सोनू सहनी