Illegal Voter ID: प. बंगाल में SIR शुरु होते हीं घुसपैठ का चौंकाने वाला खुलासा, पड़ोषी को बाप बना कर हासिल की भारतीय नागरिकता, खुलासे के बाद सियासत में भूचाल

Illegal Voter ID: एसआईआर (सर्वे ऑफ़ इंटेग्रिटी रजिस्ट्रेशन) के दौरान यह खुलासा हुआ कि एक बांग्लादेशी युवक ने फर्जी रिश्तों का सहारा लेकर भारतीय नागरिकता पाने की कोशिश की।

प. बंगाल में SIR शुरु होते हीं घुसपैठ का चौंकाने वाला खुलासा,- फोटो : social Media

Illegal Voter ID: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन और राजनीति दोनों को चौंका दिया है। एसआईआर (सर्वे ऑफ़ इंटेग्रिटी रजिस्ट्रेशन) के दौरान यह खुलासा हुआ कि एक बांग्लादेशी युवक ने फर्जी रिश्तों का सहारा लेकर भारतीय नागरिकता पाने की कोशिश की। युवक ने भारतीय नागरिक जियाद अली दफादार को अपना पिता बता कर धोखे से वोटर आईडी कार्ड और अन्य दस्तावेज़ बनवा लिए। लेकिन असली नागरिक जियाद ने प्रशासन को सूचित कर इस घुसपैठ का पर्दाफाश कर दिया।

जियाद अली दफादार ने साफ शब्दों में शिकायत दर्ज कराई कि महबूर दफादार उनका बेटा नहीं है। उन्होंने बताया कि महबूर ने उनके घर में घुसपैठ की, दस्तावेज़ चोरी किए, और अपनी पहचान गढ़ ली। जियाद के अनुसार महबूर ने उनकी पत्नी से मुलाकात का बहाना बनाकर आधार कार्ड और वोटर आईडी हासिल की और खुद को उनका पुत्र घोषित कर दिया। जियाद ने प्रशासन से गुहार लगाई कि इस धोखेबाज घुसपैठिए को देश से बाहर भेजा जाए, क्योंकि वह बंगाल की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

इस घटना ने सियासत में भी हलचल पैदा कर दी। बीजेपी बंगाल ने इसे राज्य की ममता बनर्जी सरकार की विफलता बताया और सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर निशाना साधा। पार्टी का आरोप है कि यह घुसपैठी ममता की राजनीति का वोट बैंक बना रहे हैं और एसआईआर प्रक्रिया को भी मैनिपुलेट करने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी का कहना है कि बांग्लादेशी नागरिक अब भारतीयों को अपने रिश्तेदार बताकर नागरिकता हड़प रहे हैं, जिससे राज्य की सुरक्षा खतरे में है।

वहीं टीएमसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर फर्जी वोटरों के माध्यम से अल्पसंख्यक इलाकों को निशाना बना रहे हैं। केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया केवल फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए है। उनका दावा है कि हजारों विदेशी नागरिक, खासकर बांग्लादेश मूल के लोग, फर्जी दस्तावेज़ बनाकर भारतीय नागरिक बन बैठे हैं, और इन्हें चिन्हित कर वापस भेजा जा रहा है।

इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा फर्जी पहचान और दस्तावेज़ों का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत लाभ का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौती बन चुका है। बशीरहाट का यह खुलासा बंगाल की राजनीति में नई बहस और सियासी विवादों को जन्म दे रहा है, और यह साफ संकेत है कि राज्य में घुसपैठ और नागरिकता नियमों को लेकर संवेदनशीलता अब चरम पर है।