Budget Session 2026: 1 फरवरी को निर्मला सीतारमण पेश करेंगी बजट, आम लोगों को मिलेगी बड़ी राहत, जानिए क्या होगा सस्ता-क्या होगा महंगा?

Budget Session 2026: निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को आम बजट पेश करेंगी। बजट को लेकर इस बार लोगों को बड़ी उम्मीद हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या क्या सस्ता और क्या क्या महंगा होगा?

1 फरवरी को पेश होगा बजट - फोटो : social media

Budget Session 2026: संसद का बजट सत्र जारी है। संसद में गुरुवार को आर्थिक सर्वे पेश किया जाएगा। वहीं 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। बजट देश की वित्तीय दिशा को तय करेगा। इस बार बजट रविवार को पेश किया जाएगा। रिकॉर्ड नौवीं बार निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। उन्होंने अपना पहला बजट 5 जुलाई 2019 को पेश किया था। बजट 2026 को आम आदमी, टैक्सपेयर्स, किसानों, महिलाओं और सीनियर सिटीजन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 

करदाताओं को बड़ी घोषणा की उम्मीद 

पिछले बजट में टैक्स स्लैब में बदलाव और इनकम टैक्स में राहत के बाद इस बार भी करदाताओं को बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट के ऐलानों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। बजट के बाद कुछ सामान सस्ते हो सकते हैं, तो कुछ चीजों के दाम बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।

टैक्स राहत को लेकर सबसे ज्यादा उम्मीद

पिछले बजट में सरकार ने सेक्शन 87A के तहत 12 लाख रुपये तक की इनकम को पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया था, जिससे मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिली थी। इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि टैक्स फ्री इनकम की सीमा को और बढ़ाया जा सकता है। मिडिल क्लास की मांग है कि इसे 15 लाख रुपये तक किया जाए।

बड़े बदलाव की संभावना कम 

इसके साथ ही टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि 30 फीसदी टैक्स स्लैब की सीमा को बढ़ाकर 30 लाख रुपये सालाना तक किया जाए। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो नौकरीपेशा लोगों की टेक-होम सैलरी बढ़ेगी और खर्च करने की क्षमता में इजाफा होगा। साथ ही न्यू टैक्स रिजीम को अपनाने वालों की संख्या भी बढ़ सकती है। हालांकि जानकारों का मानना है कि राजस्व पर दबाव को देखते हुए सरकार बड़े बदलावों की बजाय छोटे-छोटे सुधारों का रास्ता चुन सकती है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की संभावना

सैलरीड क्लास लंबे समय से स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की मांग कर रही है। पिछले बजट में न्यू टैक्स रिजीम के तहत इसे 75 हजार रुपये किया गया था। अब महंगाई और बढ़ते खर्च को देखते हुए उम्मीद है कि बजट 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा सकता है। इससे बिना किसी अतिरिक्त निवेश के ही टैक्स बोझ कम होगा और लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा।

सीनियर सिटीजन को भी राहत की आस

बजट 2026 से सीनियर सिटीजन को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। उनकी मांग है कि टैक्स फ्री इनकम की सीमा बढ़ाई जाए, हेल्थ इंश्योरेंस पर ज्यादा छूट दी जाए और बैंक एफडी व स्मॉल सेविंग स्कीम्स से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स में राहत मिले। इसके अलावा पेंशन और ब्याज आय पर निर्भर वरिष्ठ नागरिकों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया को और सरल करने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

महिलाओं और आम करदाताओं की उम्मीदें

महिला टैक्सपेयर्स भी बजट 2026 से खास उम्मीद लगाए बैठी हैं। उम्मीद है कि महिलाओं के लिए कुछ विशेष टैक्स छूट या प्रोत्साहन की घोषणा हो सकती है, जिससे रोजगार और बचत दोनों को बढ़ावा मिले। वहीं आम करदाताओं की मांग है कि सरचार्ज और सेस का बोझ कम किया जाए और जीएसटी नियमों को और सरल बनाया जाए।

निवेशकों को LTCG टैक्स में राहत की उम्मीद

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। निवेशकों को उम्मीद है कि बजट 2026 में इस टैक्स में कुछ राहत दी जाएगी, ताकि टैक्स कटने के बाद बेहतर रिटर्न मिल सके। यदि सरकार ऐसा करती है तो छोटे निवेशकों का भरोसा बाजार में और मजबूत हो सकता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल सेक्टर पर जोर

इस बार बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल सेक्टर पर खास फोकस रहने की संभावना है। सड़क, रेलवे, शहरी ढांचा, जल आपूर्ति, हेल्थकेयर और शिक्षा के लिए आवंटन बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश से आम आदमी की जिंदगी पर सकारात्मक असर पड़ेगा। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से कंस्ट्रक्शन और सर्विस सेक्टर को गति मिलेगी, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ मिडिल क्लास तक पहुंचेगा।

MSME और रोजगार पर नजर

सरकार बजट 2026 में एमएसएमई सेक्टर और रोजगार सृजन पर भी ध्यान केंद्रित कर सकती है। स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल स्किल्स को बढ़ावा देने के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए आसान कर्ज नीति की घोषणा संभव है। उद्योग संगठनों का मानना है कि अगर रेगुलेटरी बोझ कम किया गया और सस्ता क्रेडिट उपलब्ध कराया गया, तो रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा मिलेगा।

महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों पर असर

कम टैक्स कलेक्शन और बढ़ते सरकारी खर्च के बीच सरकार रेवेन्यू के दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर सकती है। इसमें सब्सिडी में बदलाव या इनडायरेक्ट टैक्स शामिल हो सकते हैं। यदि सब्सिडी में कटौती होती है तो पेट्रोल, डीजल और खाद के दाम बढ़ सकते हैं। वहीं लग्जरी और इंपोर्टेड आइटम्स महंगे हो सकते हैं, जबकि देश में बने उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक से जुड़े सामान सस्ते होने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर, बजट 2026 से आम आदमी, मिडिल क्लास और निवेशकों को बड़ी उम्मीदें हैं। अब सबकी नजरें 1 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि सरकार किस वर्ग को कितनी राहत और किस क्षेत्र को कितनी प्राथमिकता देती है।