Sahara Refund : सहारा निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी, ₹10 लाख तक के रिफंड के लिए पोर्टल फिर शुरू, जानें आवेदन का तरीका

Sahara Refund : सहारा रिफंड पोर्टल फिर से सक्रिय हो गया है, जिससे उन निवेशकों को राहत मिली है जिनके आवेदन में कमी थी। अब वे 10 लाख रुपये तक के दावों के लिए पुनः आवेदन कर सकते हैं, जिनका निपटारा 45 कार्यदिवस में होगा।

निवेशकों के लिए खुशखबरी - फोटो : SOCIAL MEDIA

N4N DESK : सहारा समूह की विभिन्न सहकारी समितियों में फंसा अपना पैसा वापस पाने की उम्मीद लगाए लाखों निवेशकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत की घोषणा की है। सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) ने CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल को विशेष रूप से 'री-सबमिशन' (Re-submission) के लिए फिर से सक्रिय कर दिया है। यह कदम उन निवेशकों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, जिनके आवेदन पहले किसी दस्तावेजी कमी या तकनीकी त्रुटि की वजह से खारिज कर दिए गए थे।

मंत्रालय द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अब पोर्टल पर ₹10 लाख तक के बड़े दावों के लिए भी दोबारा आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। जिन निवेशकों के पास पहले 'डिफिशिएंसी' (कमी) का संदेश आया था, वे अब अपनी गलतियों को सुधारकर पोर्टल पर नया विवरण अपलोड कर सकते हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि इन संशोधित दावों की बारीकी से जांच की जाएगी और पात्र पाए जाने पर आवेदन की तिथि से 45 कार्यदिवसों के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

बिहार के संदर्भ में यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार राज्य के लगभग 18.75 लाख निवेशकों का ₹10,154 करोड़ से अधिक का निवेश सहारा की समितियों में अटका हुआ है। अब तक बिहार के निवेशकों को लगभग ₹1,892.89 करोड़ वापस मिल चुके हैं, जो उत्तर प्रदेश के बाद देश में दूसरी सबसे बड़ी राशि है। हालांकि, राज्य के करीब 15.73 लाख निवेशक अब भी अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं, जिन्हें इस पोर्टल के माध्यम से बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

निवेशकों की भारी संख्या और कागजी पेचीदगियों को ध्यान में रखते हुए, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने रिफंड की समयसीमा को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया है। इस फैसले ने उन लोगों को एक बड़ा अवसर प्रदान किया है जो अब तक तकनीकी अड़चनों या जानकारी के अभाव में आवेदन नहीं कर पाए थे। न्यायालय और सरकार की इस साझा पहल से अब निवेशकों के पास अपनी त्रुटियों को सुधारने और आधिकारिक रूप से अपना हक मांगने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध है।

अंत में, सहकारिता मंत्रालय ने निवेशकों को बिचौलियों और फर्जी एजेंटों से सावधान रहने की कड़ी चेतावनी दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि रिफंड की पूरी प्रक्रिया डिजिटल, पारदर्शी और पूरी तरह निःशुल्क है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक पोर्टल का ही उपयोग करें ताकि उनका पैसा सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में सुरक्षित पहुंच सके। इस पारदर्शी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पात्र निवेशकों को उनकी मेहनत की कमाई वापस दिलाना है।