Ganesh Puja: बुधवार का महाउपाय! गणपति की कृपा से चमकेगा भाग्य, दूर होंगे विघ्न-बाधाएं, खुलेगी सुख-समृद्धि की राह, बस करना होगा ये काम
Ganesh Puja: सनातन धर्म के अनुसार बुधवार का दिन विशेष रूप से विघ्नहर्ता गणपति को समर्पित माना गया है।...
Ganesh Puja: सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता का पद प्राप्त है। यही कारण है कि किसी भी मांगलिक, धार्मिक अथवा शुभ कार्य के आरंभ से पूर्व श्रीगणेश का पूजन-अर्चन किया जाता है। सनातन धर्म के अनुसार बुधवार का दिन विशेष रूप से विघ्नहर्ता गणपति को समर्पित माना गया है। इस दिन विधिपूर्वक गणेश उपासना करने से जीवन में उपस्थित विविध प्रकार की बाधाएं, अवरोध और संकट दूर होने लगते हैं तथा सौभाग्य के नवीन द्वार खुलते हैं।
धर्मशास्त्रों में वर्णित है कि भगवान गणेश समस्त देवताओं में अग्रपूज्य हैं। उन्हें विघ्नों का नाश करने वाला तथा मंगल का अधिष्ठाता देव माना गया है। मान्यता है कि जो साधक श्रद्धा, भक्ति और निष्कपट भाव से गणपति की आराधना करता है, उसके रुके हुए कार्य गति प्राप्त करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गणेश कृपा से व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है तथा सफलता के मार्ग में आने वाली कठिनाइयां स्वतः समाप्त होने लगती हैं।
प्रत्येक मनुष्य सुख, शांति, समृद्धि और यश की कामना करता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इन सभी की प्राप्ति हेतु गणेश पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि गौरीनंदन अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते। उनकी कृपा से भाग्योदय होता है, आर्थिक उन्नति के योग बनते हैं तथा आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए नियमित रूप से गणपति का स्मरण और पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
धर्मग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि गणेश उपासना से बुद्धि, विवेक और ज्ञान में वृद्धि होती है। जो व्यक्ति जीवन में प्रगति, प्रतिष्ठा और सफलता प्राप्त करना चाहता है अथवा बौद्धिक क्षमता को विकसित करना चाहता है, उसे नियमित रूप से गणेश आराधना करनी चाहिए। विद्यार्थियों, व्यवसायियों और कर्मक्षेत्र में उन्नति की आकांक्षा रखने वालों के लिए यह पूजा विशेष रूप से कल्याणकारी मानी गई है।
भगवान गणेश के विशाल कर्ण सहनशीलता, धैर्य और सजग श्रवण के प्रतीक हैं। उनकी उपासना से व्यक्ति अपने अंतर्निहित सामर्थ्य को पहचानने लगता है तथा उसके व्यक्तित्व में धैर्य, संयम और सहिष्णुता का विकास होता है। यही कारण है कि बुधवार को गणपति की आराधना को जीवन में सुख, सफलता और समृद्धि का दिव्य सूत्र माना गया है।