Gaya Pind Daan: युधिष्ठिर ने जहां किया था पिंडदान, उसी पवित्र स्थल पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Gaya Pind Daan: पितृपक्ष 2026 के दौरान गया और बोधगया में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। धर्मारण्य, ब्रह्मसत, कागवलि और आम्रसचेन वेदी पर पिंडदान का महत्व जानें।

Gaya Pind Daan:  पितृपक्ष के दौरान गया और बोधगया में देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पितरों की शांति और मोक्ष की कामना को लेकर लोग अलग-अलग वेदियों पर पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं। आश्विन कृष्ण पक्ष तृतीया और पितृपक्ष के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने बोधगया की धर्मारण्य, मातंगवापी और सरस्वती वेदी पर पिंडदान किया। 


श्रद्धालुओं ने निरंजना और मुहाने नदी में स्नान करने के बाद पंचरत्न से तर्पण किया और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना की। पितृपक्ष के दौरान गया और बोधगया में कई प्रमुख वेदियों पर पिंडदान का अलग-अलग धार्मिक महत्व बताया जाता है।


धर्मारण्य वेदी पर पिंडदान की पुरानी परंपरा


बोधगया की धर्मारण्य वेदी को धार्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों, सैनिकों और युद्ध में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए यहां पिंडदान और तर्पण किया था। इसी मान्यता के कारण धर्मारण्य वेदी पर आज भी देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। लोग यहां अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करते हैं और उनकी सद्गति की कामना करते हैं।


निरंजना और मुहाने नदी में किया स्नान


पिंडदान से पहले श्रद्धालुओं ने निरंजना और मुहाने नदी में स्नान किया। इसके बाद पंचरत्न से जल अर्पित कर तर्पण किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की पूजा की और अपने पितरों की शांति के लिए प्रार्थना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार धर्मारण्य वेदी पर त्रिपिंडी श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व है। स्कंद पुराण से जुड़ी मान्यताओं में यहां श्राद्ध करने से पितृदोष और प्रेतबाधा से मुक्ति मिलने की बात कही गई है। श्रद्धालुओं ने धर्मराज जी के अष्टवृताकार यज्ञकूप में भी पूजा की और पितरों को नमन किया।


पितृपक्ष के पांचवें दिन तीन वेदियों पर पिंडदान


आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी यानी पितृपक्ष के पांचवें दिन गया धाम की तीन प्रमुख वेदियों पर पिंडदान का विधान बताया गया है। इस दिन पिंडदानी ब्रह्मसत, कागवलि और आम्रसचेन वेदी पर पिंड अर्पित करेंगे। वैतरणी तालाब के पास स्थित ब्रह्मसत वेदी को लेकर मान्यता है कि यहां भगवान ब्रह्मा ने यज्ञ किया था। धार्मिक परंपरा में इस स्थान का विशेष महत्व बताया जाता है। पिंडदानी यहां अपने पूर्वजों के लिए पूजा और पिंडदान करते हैं।


गदाखंड की परिक्रमा का भी विशेष महत्व


ब्रह्मसत तीर्थ पर पिंडदान के बाद श्रद्धालु पास स्थित गदाखंड में भी पिंड अर्पित करते हैं। इसके बाद गदाखंड की परिक्रमा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गदाखंड की परिक्रमा करने से यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। इसी विश्वास के साथ पिंडदानी यहां पूजा और परिक्रमा करते हैं और अपने पूर्वजों के मोक्ष की कामना करते हैं।


ब्रह्मसरोवर के पश्चिम में मार्कण्डेय महादेव मंदिर भी स्थित है। मंदिर के दक्षिण हिस्से में तारक ब्रह्म की मूर्ति होने की बात कही जाती है। पितृपक्ष के दौरान इन धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। गयाजी और बोधगया में पितृपक्ष के दौरान हर साल बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण करने पहुंचते हैं। इन धार्मिक मान्यताओं का संबंध श्रद्धालुओं की आस्था और परंपरा से है।