दिवाली 8 नवंबर को, दीपों के महापर्व पर जानें लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन सामग्री
दीपावली की पूजा के लिए पहले से पूजन सामग्री तैयार कर लेना बेहतर रहता है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में परंपरागत रूप से इन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है...
Diwali 2026 : रोशनी, उल्लास और खुशियों का महापर्व दीपावली रविवार, 8 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर घरों और बाजारों में तैयारियां तेज हैं। लोग घरों की साफ-सफाई, रंगोली, दीप सजावट और पूजन सामग्री की खरीदारी में जुटे हैं। दीपावली केवल दीप जलाने और मिठाइयां बांटने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक भी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाए थे। तभी से दीपावली को रोशनी और उत्सव के पर्व के रूप में मनाने की परंपरा जुड़ी है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर घर में सुख, शांति, समृद्धि और बुद्धि की कामना की जाती है।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, पटना में 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:28 बजे से 7:25 बजे तक रहेगा। यह समय प्रदोष काल और वृषभ लग्न के दौरान है। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी।
कैसे करें मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा?
सबसे पहले पूजा स्थल और घर को अच्छी तरह साफ कर लें। शाम को शुभ मुहूर्त में चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद दीप जलाकर रोली, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। गणेश जी का पूजन पहले करें, फिर मां लक्ष्मी की आराधना करें। लक्ष्मी पूजा के साथ कुबेर की पूजा करने की भी परंपरा है। अंत में परिवार के सभी सदस्य आरती करें और घर के मुख्य द्वार, आंगन तथा पूजा स्थल पर दीप जलाएं।
पूजा में क्या-क्या सामग्री रखें?
दीपावली की पूजा के लिए पहले से पूजन सामग्री तैयार कर लेना बेहतर रहता है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में परंपरागत रूप से इन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है—
- मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर
- पूजा की चौकी, लाल या पीला कपड़ा
- रोली, कुमकुम, हल्दी और अक्षत
- फूल, माला और दूर्वा
- पान, सुपारी, लौंग और इलायची
- धूप, अगरबत्ती, कपूर और घी
- मिट्टी के दीपक, रुई की बाती और तेल या घी
- कलश, गंगाजल और आम के पत्ते
- फल, मिठाई, खील-बताशे और नारियल
- चांदी या अन्य धातु के सिक्के, बही-खाता और कलम
पूजा में स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष महत्व माना जाता है। अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार सामग्री रखी जा सकती है।
दीपावली का सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व
दीपावली का संदेश सिर्फ धन और वैभव तक सीमित नहीं है। यह पर्व हमें अपने भीतर के अंधकार को दूर करने, बुराइयों का त्याग करने और जीवन में सकारात्मकता अपनाने की प्रेरणा देता है। दीपक की छोटी-सी लौ यह संदेश देती है कि अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, प्रकाश की एक किरण उसे दूर कर सकती है।