Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि आज, भगवान शिव के पूजा के सबसे जान लीजिए सबसे शुभ मुहूर्त, दुर्लभ योगों के बीच पूरी रात रहेगा चतुर्दशी
Mahashivratri 2026: पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष फलदायी माना जाता है। मंदिर में जाकर भी श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन में भाग लेते हैं।
Mahashivratri 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि पर्व इस वर्ष 15 फरवरी, रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस दिन दिनभर त्रयोदशी तिथि रहेगी और शाम 5 बजकर 4 मिनट से चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जाएगी, जो पूरी रात बनी रहेगी। यही समय महाशिवरात्रि का विशेष पुण्यकाल माना जाता है।
पूजा की शुभमुहर्त
सूर्योदय सुबह 6 बजकर 25 मिनट पर होगा। त्रयोदशी शाम 4 बजकर 23 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होकर पूरी रात व्याप्त रहेगी। उत्तराषाढ़ नक्षत्र शाम 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। इस दौरान व्यतिपात, वरियान और अमृत सिद्धि जैसे शुभ योग भी बन रहे हैं, जिन्हें साधना और पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:25 से शाम 7:26 तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर में पड़ेगा। वहीं निशीथ काल रात 11:52 से 12:42 तक रहेगा, जिसे विशेष पूजा के लिए सबसे शुभ समय माना गया है।
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मध्यरात्रि में भगवान शिव का रुद्र रूप में प्रकट होना बताया जाता है। इसे शिव-विवाह उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है और वर्ष की सबसे सिद्ध रात्रियों में इसकी गणना होती है। इस दिन व्रत, जप और रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना जाता है।
प्रमुख मुहूर्त और पूजा का समय
चतुर्दशी तिथि: 15 फरवरी शाम 5:04 से 16 फरवरी शाम 5:34 तक
विशेष पुण्यकाल: 15 फरवरी शाम 5:04 से
निशीथ काल पूजा: रात 12:37 से 1:32 बजे (16 फरवरी)
रात्रि प्रथम प्रहर: शाम 6:11 से 9:38 बजे
द्वितीय प्रहर: 9:38 से 1:04 बजे
तृतीय प्रहर: 1:04 से 4:31 बजे
चतुर्थ प्रहर: 4:31 से सुबह 7:57 बजे
घर और मंदिर में पूजा की विधि
महाशिवरात्रि के दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनकर पूजा की शुरुआत की जाती है। शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष फलदायी माना जाता है। मंदिर में जाकर भी श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन में भाग लेते हैं। इस बार रात 7:40 बजे तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा, जिसे भगवान शिव का प्रिय नक्षत्र माना जाता है।
क्या चढ़ाएं और क्या न चढ़ाएं
पूजा में गंगाजल, दूध, दही, घी, मधु, बेलपत्र, धतूरा और चंदन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इन वस्तुओं से अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वहीं केतकी का फूल, तुलसी पत्ते, मुरझाए फूल और बासी प्रसाद शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए।
श्रद्धा और भक्ति का पर्व
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर व्यतिपात, सर्वार्थ सिद्धि और अन्य शुभ योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसे में भक्त दिनभर जलाभिषेक, व्रत और रात्रि में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने की कामना करेंगे।