Ph.D New Rule: UGC का मास्टरस्ट्रोक! Ph.D के पुराने नियम बदले, जानिए अब कितने सालों तक पूरी कर सकेंगे अपनी रिसर्च
Ph.D New Rule: नए संशोधनों के तहत शोधार्थियों को अपनी थीसिस पूरी करने और डिग्री हासिल करने के लिए अब पहले के मुकाबले अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन छात्रों को मिलेगा जो अपनी रिसर्च के अंतिम चरण में हैं।
Ph.D New Rule: इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने पीएचडी शोधार्थियों के लिए संशोधित अधिसूचना जारी करते हुए नियमों में अहम बदलाव किए हैं। विश्वविद्यालय ने 20 फरवरी 2024 की पूर्व अधिसूचना को निरस्त कर दिया है और अब 7 नवंबर 2022 से पहले और बाद में नामांकित शोधार्थियों के लिए अलग-अलग प्रावधान लागू किए गए हैं।
7 नवंबर 2022 से पहले पंजीकृत शोधार्थियों के लिए नियम
7 नवंबर 2022 से पहले पंजीकृत शोधार्थियों के लिए 2019 के नियम लागू रहेंगे। जिसके तहत पीएचडी की अधिकतम अवधि 6 वर्ष तय किया गया है। 5 वर्ष पूरे होने पर विभागीय अनुसंधान समिति (DPC) की सिफारिश से विस्तार संभव है। विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 7 वर्ष तक का अंतिम विस्तार (RDC की अनुशंसा पर) होगा। महिला और 40% से अधिक दिव्यांग शोधार्थियों के लिए अधिकतम अवधि 8 वर्ष तय किया गया है। तय समय में शोध पूरा न होने पर पंजीकरण स्वतः समाप्त हो जाएगी। पुनः पंजीकरण बिना प्रवेश परीक्षा (CRET) के संभव होगा।
7 नवंबर 2022 के बाद नामांकित शोधार्थियों के लिए नियम
7 नवंबर 2022 के बाद नामांकित शोधार्थियों पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2022 विनियम लागू होंगे। न्यूनतम अवधि 3 वर्ष और अधिकतम 6 वर्ष होगा। 3 वर्ष बाद DPC की सिफारिश से 2 वर्ष तक विस्तार होगा। 5 वर्ष बाद RDC की अनुशंसा से 1 वर्ष अतिरिक्त विस्तार होगा। महिला और दिव्यांग शोधार्थियों के लिए अधिकतम अवधि 8 वर्ष तय किए गए हैं। अधिकतम अवधि पूरी होने पर पंजीकरण समाप्त हो जाएगी, लेकिन बिना प्रवेश परीक्षा पुनः पंजीकरण का अवसर मिलेगा।
2 वर्ष के भीतर शोध पूरा करना होगा
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह समयसीमा अंतिम होगी और इसके बाद किसी प्रकार की अतिरिक्त छूट नहीं दी जाएगी। नए नियमों का उद्देश्य शोध कार्य को समयबद्ध और प्रभावी बनाना है। ऐसे में पुनः पंजीकरण के बाद किसी भी परिस्थिति में शोधार्थियों को 2 वर्ष के भीतर शोध पूरा करना होगा। जिसके बाद उन्हें मौका नहीं मिलेगा।