Bird Flu Alert: बर्ड फ्लू का बढ़ता खतरा! क्या दूध पीने से भी फैल सकता है बर्ड फ्लू? जानिए डॉक्टर की राय

Bird Flu Alert: बर्ड फ्लू यानी H5N1 वायरस को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है।

बर्ड फ्लू का बढ़ता खतरा- फोटो : X

Bird Flu Alert:  बर्ड फ्लू यानी H5N1 वायरस को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। यह वायरस मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में गायों समेत दूसरे स्तनधारी जानवरों और इंसानों में भी संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। अमेरिका में संक्रमित पशुओं के संपर्क से इंसान के संक्रमित होने की खबरों के बीच अब लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या गाय का दूध पीने से भी बर्ड फ्लू हो सकता है? क्या बाजार में मिलने वाला दूध सुरक्षित है? और भारत में रहने वाले लोगों को इस वायरस से कितना सतर्क रहने की जरूरत है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, संक्रमित गायों के कच्चे दूध में H5N1 वायरस पाया गया है। इसलिए कच्चा दूध पीने से बचने और पाश्चुरीकृत दूध का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में मिलने वाला हर दूध संक्रमित है या भारत में संक्रमण फैलने की पुष्टि हो गई है।

क्या है H5N1 वायरस और कैसे फैलता है संक्रमण?

H5N1 इन्फ्लूएंजा वायरस का एक प्रकार है, जिसे आमतौर पर बर्ड फ्लू कहा जाता है। यह मुख्य रूप से पक्षियों में फैलता है। संक्रमित पक्षियों, उनके स्राव, मल और दूषित वातावरण के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में यह वायरस गायों जैसे स्तनधारी जानवरों और इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है।

इंसानों में संक्रमण अपेक्षाकृत दुर्लभ है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इसके संभावित लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द और आंखों में लालिमा या सूजन शामिल हैं। गंभीर मामलों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। अमेरिका में संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने वाले लोगों में संक्रमण के मामले सामने आने से पशुपालकों, डेयरी कर्मचारियों और संक्रमित जानवरों के संपर्क में रहने वाले लोगों की सतर्कता और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

क्या कच्चा दूध पीने से हो सकता है बर्ड फ्लू?

H5N1 को लेकर सबसे बड़ा सवाल दूध की सुरक्षा का है। विशेषज्ञों के मुताबिक, संक्रमित गायों के कच्चे दूध में वायरस मौजूद हो सकता है। ऐसे में बिना पाश्चुरीकरण वाला दूध पीना स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।पाश्चुरीकरण दूध को निर्धारित तापमान पर गर्म करने की प्रक्रिया है, जिससे हानिकारक सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय किया जाता है। उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक, व्यावसायिक पाश्चुरीकरण की प्रक्रिया H5N1 वायरस को निष्क्रिय करने में प्रभावी है। इसलिए पाश्चुरीकृत दूध और उससे बने उत्पादों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, कच्चे दूध के सेवन से इंसानों में H5N1 संक्रमण फैलने की वास्तविक संभावना और इसकी सीमा को लेकर वैज्ञानिक आकलन जारी है। इस अनिश्चितता के बावजूद कच्चे दूध से बचना एक महत्वपूर्ण एहतियात है।

दूध पीने वालों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक, दूध के सेवन में कुछ बुनियादी सावधानियां अपनाकर जोखिम कम किया जा सकता है।कच्चा दूध न पिएं: बिना पाश्चुरीकरण वाले दूध में H5N1 समेत दूसरे हानिकारक रोगाणु मौजूद हो सकते हैं।भरोसेमंद स्रोत से प्राप्त और उचित तरीके से प्रोसेस किया गया दूध इस्तेमाल करें। यदि पाश्चुरीकृत दूध उपलब्ध नहीं है, तो कच्चे दूध को अच्छी तरह उबालना जोखिम कम करने का महत्वपूर्ण उपाय है।

क्या भारत में भी फैल सकता है H5N1?

H5N1 को लेकर सतर्क रहना जरूरी है, लेकिन बिना प्रमाण के देश में संक्रमण फैलने की आशंका को लेकर दहशत फैलाना उचित नहीं है। किसी दूसरे देश में संक्रमण का मामला सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि भारत में भी व्यापक संक्रमण फैल रहा है।भारत में लोगों को फिलहाल सुरक्षित खाद्य पदार्थों का सेवन करने, कच्चे दूध से बचने और बीमार पक्षियों या जानवरों के सीधे संपर्क से दूर रहने पर ध्यान देना चाहिए। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।H5N1 को लेकर घबराने के बजाय सावधानी बरतना सबसे जरूरी है। कच्चे दूध का सेवन न करें, पाश्चुरीकृत दूध को प्राथमिकता दें और संक्रमण के संभावित लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लें। सही जानकारी और एहतियात से अनावश्यक जोखिम को कम किया जा सकता है।